यह मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि जिस स्कॉर्पियो को 19 जून 2020 को गोपालगंज के सिधवलिया थाना क्षेत्र में करीब 340 लीटर शराब के साथ जब्त किया गया था, उसकी वास्तविक पहचान और रजिस्ट्रेशन नंबर को लेकर कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद EOU ने मामले की नए सिरे से जांच शुरू की थी। सुनील कुमार सिंह की गिरफ्तारी के साथ इस प्रकरण में अब तक चार आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
बिना भौतिक सत्यापन के तैयार की गई थी मूल्यांकन रिपोर्ट?
आर्थिक अपराध इकाई के अनुसार, जब्त स्कॉर्पियो की नीलामी प्रक्रिया के दौरान सुनील कुमार सिंह गोपालगंज जिले में मोटरयान निरीक्षक के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने वाहन का भौतिक सत्यापन किए बिना उसका मूल्यांकन प्रतिवेदन सौंप दिया। जांच एजेंसी के मुताबिक, रिपोर्ट में वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर BR06PD-9070 और न्यूनतम निर्धारित मूल्य दर्ज किया गया, लेकिन इंजन और चेचिस नंबर का उल्लेख नहीं किया गया। जबकि इंजन और चेचिस नंबर के आधार पर वाहन की वास्तविक पहचान सामने आ सकती थी।EOU की जांच में सामने आया कि वाहन के इंजन और चेचिस नंबर के आधार पर उसका वास्तविक रजिस्ट्रेशन नंबर अलग होना चाहिए था। ऐसे में वाहन की पहचान, मूल्यांकन और नीलामी की प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई है।
चोरी की शिकायत के बावजूद नीलाम हो गई स्कॉर्पियो
इस मामले की शुरुआत 19 जून 2020 को हुई, जब गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने कथित फर्जी नंबर प्लेट लगी एक स्कॉर्पियो को करीब 340 लीटर शराब के साथ जब्त किया था। इस संबंध में सिधवलिया थाना कांड संख्या 125/2020 दर्ज किया गया। बताया गया है कि वाहन के वास्तविक मालिक ने दिसंबर 2019 में ही रोहतास जिले के दिनारा थाना क्षेत्र में गाड़ी चोरी होने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद जब्त वाहन की नीलामी कर दिए जाने का मामला सामने आया। वाहन की पहचान और नीलामी की प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद वास्तविक मालिक ने न्याय के लिए पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद आर्थिक अपराध इकाई ने मामले की जांच शुरू की। अब जांच एजेंसी जब्ती से लेकर वाहन के सत्यापन, मूल्यांकन और नीलामी तक की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की पड़ताल कर रही है।
पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं तीन आरोपित
स्कॉर्पियो नीलामी प्रकरण में सुनील कुमार सिंह से पहले तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
- राजेंद्र राम: सिधवलिया थाना में दर्ज मामले के तत्कालीन अनुसंधानकर्ता को 8 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
- कन्हैया लाल: गोपालगंज जिला परिवहन कार्यालय के तत्कालीन लिपिक को 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
- हैदर अली अंसारी: जिला परिवहन कार्यालय के तत्कालीन डाटा एंट्री ऑपरेटर को भी 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
EOU के अनुसार, इन गिरफ्तारियों के बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच एजेंसी संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और नीलामी प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का सत्यापन कर रही है।
तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक और नीलामी समिति के सदस्य भी जांच के दायरे में
इस प्रकरण में गोपालगंज के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक राकेश कुमार, वाहन खरीदने वाले बोलीदाता रियाजुल आलम और नीलामी समिति के अन्य सदस्यों के नाम भी आरोपितों में शामिल बताए गए हैं। आर्थिक अपराध इकाई मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वाहन की वास्तविक पहचान का सत्यापन कैसे नहीं हो सका और नीलामी की प्रक्रिया किन परिस्थितियों में पूरी हुई। हालांकि, किसी भी आरोपित की भूमिका और दोष की अंतिम पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
अब आगे क्या होगा?
सुनील कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अन्य संबंधित अधिकारियों और नीलामी प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका पर जांच एजेंसी की नजर है। जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। गोपालगंज का यह मामला जब्त वाहनों के सत्यापन, सरकारी नीलामी की पारदर्शिता और वास्तविक वाहन मालिकों के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। अब देखना होगा कि EOU की जांच में नीलामी प्रक्रिया की कथित गड़बड़ी को लेकर आगे क्या तथ्य सामने आते हैं।

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