प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात को न्याय मित्रों की लंबे समय से लंबित मांगों को सरकार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। मंत्री ने संगठन की कोर टीम को पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर बैठक के लिए आने का निर्देश भी दिया, ताकि मामले पर विस्तार से चर्चा की जा सके।
19 वर्षों की सेवा के बाद भी 7,000 रुपये मानदेय
बिहार की ग्राम कचहरियों में न्यायिक कार्यों में सहयोग करने वाले न्याय मित्रों का कहना है कि उनकी शैक्षणिक योग्यता, जिम्मेदारियों और लंबे कार्यकाल को देखते हुए वर्तमान मानदेय पर्याप्त नहीं है। संघ के मुताबिक, न्याय मित्र विधि स्नातक हैं और लंबे समय से ग्राम कचहरी व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनका मासिक मानदेय 7,000 रुपये पर ही बना हुआ है।
बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों के बीच इतनी कम राशि में परिवार की जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौती बन गया है। संघ ने सरकार से मांग की है कि न्याय मित्रों के मानदेय की समीक्षा कर सम्मानजनक वृद्धि की जाए, ताकि उनकी आर्थिक परेशानियों को कम किया जा सके।
दूसरे संविदा कर्मियों के मानदेय से तुलना
ज्ञापन में संघ ने अन्य विभागों में कार्यरत संविदा कर्मियों के मानदेय का मुद्दा भी उठाया। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि विभिन्न विभागों में संविदा पर बहाल कई कर्मियों के मानदेय में समय-समय पर बढ़ोतरी हुई है, जबकि न्याय मित्रों का मानदेय लंबे समय से अपरिवर्तित है। संघ ने इसे मानदेय संबंधी असमानता बताते हुए सरकार से न्याय मित्रों की योग्यता, अनुभव और कार्य की प्रकृति के अनुरूप निर्णय लेने की अपील की। संगठन की मांग है कि मानदेय वृद्धि के मामले को केवल आश्वासन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
नवादा में मंत्रियों को सौंपा गया ज्ञापन
बिहार राज्य न्याय मित्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने नवादा में गांधी स्कूल स्थित कार्यक्रम स्थल पर एनडीए के कार्यक्रम के दौरान अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। इस दौरान न्याय मित्रों की आर्थिक स्थिति, लंबे समय से लंबित मानदेय वृद्धि और उनकी सेवा से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट कराया गया। प्रतिनिधिमंडल में आदित्य राज मेधावी, प्रदेश उपाध्यक्ष, जदयू विधि प्रकोष्ठ, राजकुमार, अधिवक्ता व अध्यक्ष, बिहार राज्य न्याय मित्र संघ, नवादा और प्रमोद कुमार, अधिवक्ता व महासचिव, बिहार राज्य न्याय मित्र संघ, नवादा शामिल रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रियों के समक्ष मांग रखी कि न्याय मित्रों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि के लिए सरकार स्पष्ट पहल करे और लंबे समय से चली आ रही विसंगति को दूर किया जाए।
पंचायती राज मंत्री ने क्या आश्वासन दिया?
संघ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पंचायती राज मंत्री ने ज्ञापन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए न्याय मित्रों के मानदेय से जुड़े मामले को गंभीरता से देखने और इसमें बढ़ोतरी किए जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने संगठन की कोर टीम को पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर बैठक के लिए बुलाने की बात कही। इस बैठक में बिहार स्तर पर न्याय मित्रों की मांगों, मानदेय वृद्धि और आगे की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, मानदेय की नई राशि, वृद्धि लागू होने की तारीख और इस संबंध में किसी औपचारिक सरकारी आदेश की जानकारी फिलहाल प्रतिनिधिमंडल की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसलिए मंत्री के आश्वासन को मानदेय वृद्धि का अंतिम सरकारी आदेश नहीं माना जाना चाहिए। न्याय मित्रों को अब प्रस्तावित बैठक और सरकार की ओर से होने वाली आगे की कार्रवाई का इंतजार रहेगा।
पटना की बैठक पर टिकी न्याय मित्रों की निगाहें
प्रतिनिधिमंडल ने सकारात्मक आश्वासन के लिए पंचायती राज मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है। संघ के नेतृत्व का कहना है कि बिहार की कोर टीम के साथ पटना में होने वाली बैठक के जरिए मांगों को विस्तार से रखा जाएगा और आगे की रणनीति तय की जाएगी। न्याय मित्रों की प्रमुख अपेक्षा है कि लंबे समय से लंबित मानदेय वृद्धि के मामले में सरकार व्यावहारिक और समयबद्ध निर्णय ले। अब देखना होगा कि प्रस्तावित बैठक के बाद मानदेय बढ़ोतरी की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और न्याय मित्रों को कब तक इसका ठोस लाभ मिल पाता है।

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