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Bihar Nyaya Mitra: न्यायमित्रों को ₹30 हजार मानदेय देने का चुनावी वादा, 19 अक्टूबर तक आदेश नहीं तो मतदान पर सामूहिक फैसला!

 

जागरण प्रभात। बिहार में ग्राम कचहरी न्यायमित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग अब राजनीतिक मुद्दा बनती दिखाई दे रही है। गर्दनीबाग में 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक चले तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन के बाद न्यायमित्रों की मांगों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने का दावा किया जा रहा है। कांग्रेस के कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी मनोज कुमार जायसवाल ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में न्यायमित्रों का मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने सहित उनकी अन्य मांगों को शामिल किया है।

हालांकि, यह चुनावी घोषणा अभी सरकार की ओर से मानदेय वृद्धि की आधिकारिक स्वीकृति नहीं है। न्यायमित्रों की निगाहें अब बिहार सरकार के निर्णय और आदेश पर टिकी हैं। ग्राम कचहरी न्यायमित्र संघ बिहार के प्रदेश अध्यक्ष रमा शंकर राय ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश से 19 अक्टूबर 2026 तक मानदेय वृद्धि के संबंध में आवश्यक आदेश जारी करने की मांग की है।

चुनावी घोषणा-पत्र में जगह मिलने से बढ़ी उम्मीद

ग्राम कचहरी न्यायमित्रों का कहना है कि वे वर्ष 2007 से ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके मानदेय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से आर्थिक परेशानियां बनी हुई हैं। इसी बीच कांग्रेस के कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी मनोज कुमार जायसवाल की ओर से न्यायमित्रों का मानदेय 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा को उनके मुद्दे के राजनीतिक स्तर पर उठने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। न्यायमित्रों के लिए अब सवाल केवल चुनावी वादे का नहीं, बल्कि यह भी है कि उनकी मांगों पर ठोस सरकारी निर्णय कब लिया जाएगा। क्या चुनावी घोषणा उनकी वर्षों पुरानी मांग को आगे बढ़ाने में मदद करेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है।

19 साल की सेवा के बाद भी मानदेय बढ़ने का इंतजार

ग्राम कचहरी न्यायमित्र संघ बिहार के प्रदेश अध्यक्ष रमा शंकर राय के अनुसार, वर्ष 2007 से ग्राम कचहरियों में कार्यरत न्यायमित्र ग्रामीण स्तर पर सस्ता, सुलभ और स्थानीय न्याय उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे सरपंच, उपसरपंच, पंच और ग्राम कचहरी सचिव के साथ समन्वय बनाकर न्यायिक कार्यों में सहयोग करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर विवादों के निपटारे में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। राय का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद मानदेय और सेवा संबंधी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से न्यायमित्रों में असंतोष बढ़ रहा है। संघ की ओर से दावा किया गया है कि पंचायती राज विभाग ने 1 जुलाई 2025 से मानदेय वृद्धि प्रभावी करने के संबंध में पत्र जारी किया था, लेकिन न्यायमित्रों को अब तक इसका लाभ नहीं मिला है। इस दावे और संबंधित पत्र की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

19 अक्टूबर तक आदेश जारी करने की मांग

रमा शंकर राय ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश से मांग की है कि 19 अक्टूबर 2026 तक मानदेय वृद्धि संबंधी आदेश जारी कर आवश्यक स्वीकृति दी जाए। संघ के अनुसार, बिहार में 8,049 ग्राम कचहरी न्यायमित्र इस मुद्दे से जुड़े हैं। उनके मानदेय में बढ़ोतरी का सवाल हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति और भविष्य से संबंधित है। न्यायमित्रों का कहना है कि लंबे समय से इस विषय पर मांग उठाई जा रही है। ऐसे में उन्हें केवल आश्वासन के बजाय स्पष्ट निर्णय और उसके क्रियान्वयन की प्रतीक्षा है।

स्नातक निर्वाचन में सामूहिक निर्णय की चेतावनी

ग्राम कचहरी न्यायमित्र संघ ने मानदेय वृद्धि को स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति से भी जोड़ दिया है। रमा शंकर राय ने कहा कि न्यायमित्र उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले लोग हैं और स्नातक निर्वाचन की प्रक्रिया में मतदाता के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 19 अक्टूबर 2026 तक मानदेय वृद्धि का आदेश जारी नहीं होता है, तो बिहार के 8,049 न्यायमित्र अपने परिवारों और संबंधियों के साथ विचार-विमर्श कर मतदान को लेकर सामूहिक निर्णय लेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब न्यायमित्रों की मांगों को एक चुनावी घोषणा-पत्र में शामिल किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, संघ के संभावित सामूहिक निर्णय और वास्तविक चुनावी रुख को लेकर अभी कोई अंतिम परिणाम सामने नहीं है।

सरकार के फैसले पर टिकीं न्यायमित्रों की निगाहें

5 से 7 अक्टूबर तक पटना के गर्दनीबाग में आयोजित धरना-प्रदर्शन के बाद न्यायमित्रों ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बढ़ाने का संकेत दिया है। चुनावी घोषणा-पत्र में मानदेय को 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने का वादा उनकी मांगों को राजनीतिक बहस में जगह दे सकता है। लेकिन चुनावी वादे और सरकारी आदेश के बीच अंतर है। फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि बिहार सरकार मानदेय वृद्धि पर क्या निर्णय लेती है और संघ की ओर से उठाई गई मांगों पर कब तक कार्रवाई होती है।

अब 19 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो गई है। क्या न्यायमित्रों को मानदेय वृद्धि का आदेश मिलेगा, या उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा? इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।


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