जागरण प्रभात। बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। जादोपुर थाना क्षेत्र में अवैध हिरासत, भ्रष्टाचार और कथित उगाही के आरोपों की जांच के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों और एक कथित बिचौलिए को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की विभागीय और कानूनी जांच अभी जारी है।
जादोपुर थाने के तत्कालीन SHO गिरफ्तार
गिरफ्तार किए गए लोगों में जादोपुर थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल राम, पुलिस चौकीदार महंत कुमार यादव, पुलिस चालक राकेश कुमार और कथित बिचौलिए राजू यादव शामिल हैं। गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी के अनुसार, कुछ लोगों को कथित तौर पर बिना आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के थाना परिसर में रखने और उनकी रिहाई के बदले पैसे मांगने की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद मामले की जांच कराई गई।
बिना FIR करीब 36 घंटे हिरासत में रखने का आरोप
जिला पुलिस के अनुसार, एसपी को 16 अगस्त को शिकायत मिली थी। इसके बाद मुख्यालय डीएसपी को जांच की जिम्मेदारी दी गई। जांच अधिकारी ने 18 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। जांच में आरोप सामने आया कि जीतन राम, विजय राम, शंकर राम, एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी को 14 और 15 अगस्त को बिना प्राथमिकी दर्ज किए और आवश्यक कानूनी अनुमति के करीब 36 घंटे तक थाना परिसर में रखा गया।
केस में फंसाने की धमकी देकर पैसे मांगने का आरोप
पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि हिरासत में रखे गए लोगों को एक मामले में फंसाने की धमकी दी गई। आरोप है कि कथित बिचौलिए और कुछ ग्रामीणों के माध्यम से उनसे पैसे की मांग की गई। मामले में कथित अवैध वसूली और पुलिस पद के दुरुपयोग के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने कार्रवाई की है। अन्य मीडिया रिपोर्टों में भी इस मामले को जादोपुर थाने में कथित भ्रष्टाचार और उगाही से जुड़ा मामला बताया गया है।
न्यायिक हिरासत में भेजे गए
एसपी के मुताबिक, तत्कालीन थानाध्यक्ष और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया गया और न्यायिक हिरासत में भेजा गया। कथित बिचौलिए को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
जादोपुर थाने से सामने आया यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें पुलिस हिरासत और कथित वसूली से जुड़े आरोप हैं। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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