जागरण प्रभात। बिहार में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस मुख्यालय ने बड़ी तैयारी की है। राज्य के सभी जिलों में चर2500णबद्ध तरीके से 2500 ‘पुलिस दीदी’ टीमों का गठन किया जाएगा। इन टीमों का मुख्य फोकस स्कूल-कॉलेज, हॉस्टल, कोचिंग संस्थान, बाजार, पार्क, मॉल और अन्य संवेदनशील स्थानों पर महिलाओं व छात्राओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना होगा।
पहले चरण में 1000 से अधिक पुलिस दीदी टीमों का गठन किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में 1500 नई टीमों का गठन किया जाएगा। महिला पुलिसकर्मियों की ये टीमें अपने थाना क्षेत्रों में चिन्हित हॉट-स्पॉट पर नियमित गश्त और निगरानी करेंगी।
स्कूल-कॉलेज से लेकर बाजार तक रहेगी नजर
पुलिस दीदी टीमों के लिए थाना स्तर पर महिला एवं बालिका अपराध की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों को हॉट-स्पॉट के रूप में चिह्नित किया जा रहा है। इनमें स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, कोचिंग संस्थान, मॉल, पार्क, सिनेमा हॉल, मेला और बाजार प्रमुख हैं। टीम की महिला पुलिसकर्मी इन स्थानों पर छात्राओं और महिलाओं से संवाद करेंगी। उनकी समस्याओं को समझने के साथ छेड़छाड़ या महिलाओं को परेशान करने वाले लोगों की पहचान कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
छात्राओं के आने-जाने के समय विशेष गश्त
पुलिस दीदी की टीमों को हॉट-स्पॉट वाले इलाकों में खासकर उस समय तैनात किया जाएगा, जब स्कूल-कॉलेज की छात्राओं की आवाजाही अधिक रहती है। टीम की गतिविधियों और प्राप्त शिकायतों का नियमित लॉग बुक भी मेंटेन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर पीड़ित बालिकाओं की काउंसिलिंग कराई जाएगी। नाबालिगों से जुड़े मामलों में आवश्यक प्रक्रिया के तहत सामाजिक जांच रिपोर्ट तैयार कर संबंधित किशोर न्याय पर्षद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
Dial-112 से जुड़ी रहेंगी पुलिस दीदी टीमें
आपात स्थिति में पुलिस दीदी टीम को तत्काल अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने के लिए Dial-112 वाहनों से टैग किया जाएगा। जरूरत के अनुसार आसपास की दूसरी पुलिस दीदी टीमों के साथ इंटर-टैगिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे किसी गंभीर या आपात स्थिति में महिला पुलिसकर्मियों के साथ अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर तेजी से भेजने में मदद मिलेगी।
महिला पुलिसकर्मियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
पुलिस दीदी टीम में शामिल महिला पुलिसकर्मियों को करीब दो सप्ताह का क्षेत्रीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में महिला एवं बालिका सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधान, आत्मरक्षा, CPR, बॉडी-वॉर्न कैमरा और अन्य व्यावहारिक विषय शामिल होंगे। स्कूल-कॉलेज के प्राचार्यों, शिक्षकों और हॉस्टल वार्डनों के साथ भी टीम समन्वय स्थापित करेगी। छात्राओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े उपायों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
3700 स्कूटर-बाइक का हो रहा आवंटन
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक चिह्नित हॉट-स्पॉट और फील्ड पेट्रोलिंग की जरूरत को देखते हुए उपलब्ध 3700 स्कूटर और बाइक का जिलों को आवंटन किया जा रहा है। इससे महिला पुलिसकर्मियों को संवेदनशील स्थानों तक तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी।
हर महीने होगी कार्रवाई की समीक्षा
पुलिस दीदी टीमों द्वारा दर्ज शिकायतों और की गई कार्रवाई की हर महीने होने वाली अपराध गोष्ठी में समीक्षा की जाएगी। इससे संवेदनशील इलाकों की पहचान करने और वहां पुलिस की मौजूदगी को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
क्या है ‘पुलिस दीदी’ अभियान का मकसद?
‘पुलिस दीदी’ अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को केवल अपराध होने के बाद पुलिस सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि अपराध की आशंका वाले स्थानों पर पहले से पुलिस की मौजूदगी बढ़ाकर घटनाओं को रोकना है। स्कूल-कॉलेज, कोचिंग, हॉस्टल और बाजार जैसे स्थानों पर महिला पुलिसकर्मियों की नियमित निगरानी से छात्राओं और महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा मिलने की उम्मीद है।
Bihar Police Didi: 2500 टीमों के गठन, हॉट-स्पॉट की निगरानी और Dial-112 से कनेक्टिविटी के जरिए बिहार में महिला एवं बालिका सुरक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की तैयारी है।

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