जागरण प्रभात। बिहार में अपराध पर शिकंजा कसने के लिए राज्य सरकार ने अपराध नियंत्रण कानून को और व्यापक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA), 2024 में किए गए संशोधनों के बाद अब अपराध के बदलते स्वरूप के अनुरूप कई नई श्रेणियों को कानून के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। इनमें जमीन माफिया, पेपर लीक गिरोह, अवैध खनन, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधी और सोशल मीडिया के जरिए घृणा या वैमनस्य फैलाने वाले लोग शामिल हैं।
जमीन कब्जाने से लेकर पेपर लीक तक पर CCA की तैयारी
संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब ऐसे अपराधों को भी अपराध नियंत्रण कानून के दायरे में लाने का रास्ता साफ किया गया है, जिनका सीधा असर आम लोगों की संपत्ति, शिक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर पड़ता है। किसी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से उसकी चल या अचल संपत्ति से बेदखल करने तथा सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर अवैध कब्जा या व्यापक नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में भी CCA के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसी तरह प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक करने वाले गिरोह और संगठित कदाचार से जुड़े मामलों को भी कानून में शामिल किया गया है। विधानसभा से पारित संशोधन विधेयक में भूमि माफिया और पेपर लीक से जुड़े अपराधियों पर CCA लगाने का प्रावधान प्रमुख रूप से सामने आया है।
सोशल मीडिया पर भी बढ़ेगी कानूनी सख्ती
संशोधन में डिजिटल माध्यम से होने वाले अपराधों को भी गंभीरता से लिया गया है। सोशल मीडिया पर जाति, धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर शत्रुता अथवा घृणा फैलाने वाली गतिविधियों को अपराध नियंत्रण कानून के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने कानून में बदलाव की जरूरत के पीछे अपराध के बदलते स्वरूप, डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और इंटरनेट आधारित अपराधों में वृद्धि को प्रमुख कारण बताया है। जुलाई में कैबिनेट ने CCA संशोधन विधेयक को मंजूरी दी थी और बाद में बिहार विधानसभा से विधेयक पारित होने की रिपोर्ट सामने आई।
अवैध खनन और वन्यजीवों को नुकसान भी दायरे में
अवैध खनन जैसे संगठित आर्थिक अपराधों के साथ वन क्षेत्र और वन्यजीवों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने वाले मामलों को भी नए प्रावधानों में जगह दी गई है। मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को भी कानून के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। इस तरह संशोधन का दायरा केवल पारंपरिक अपराधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठित और नए स्वरूप के अपराधों पर भी केंद्रित होगा।
CCA लगाने के लिए क्या बदलेगा मापदंड?
संशोधित प्रावधानों के अनुसार चिन्हित अपराधियों पर CCA लगाने के लिए पिछले पांच वर्षों के दौरान कम से कम दो मामलों में पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने और उनमें संबंधित व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने की शर्त बताई गई है। इसी अवधि में कम से कम एक मामले में दोषसिद्धि का प्रावधान भी रखा गया है। पहले संबंधित अवधि दो वर्ष थी। संशोधन के बाद इसे पांच वर्ष किए जाने से CCA की कार्रवाई के लिए अपराधों के पिछले रिकॉर्ड को अधिक व्यापक अवधि में देखने का प्रावधान सामने आता है।
जिला बदर की अवधि भी बढ़ सकती है
संशोधित व्यवस्था में बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम की धारा 12 के तहत जिलाधिकारी को पहली बार अधिकतम 12 महीने के लिए किसी चिन्हित व्यक्ति को जिले या निर्धारित क्षेत्र से बाहर करने का आदेश देने का प्रावधान बताया गया है। पहले यह अवधि छह महीने तक थी। आवश्यकता पड़ने पर समीक्षा के बाद इसे छह-छह महीने के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। ऐसे आदेश से प्रभावित व्यक्ति को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपील का अधिकार भी रहेगा।
DM के अधिकारों का मतलब क्या है?
CCA के तहत जिला प्रशासन को अपराधियों की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण शक्तियां मिलती हैं। इनमें चिन्हित व्यक्ति को जिले या उसके किसी हिस्से से बाहर करने का आदेश, समय-समय पर थाने में हाजिरी लगाने का निर्देश और उसकी गतिविधियों की जानकारी लेने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। लोक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करने वाले मामलों में कानून के तहत निरोधात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि CCA जैसी कार्रवाई कानून में निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित प्राधिकारी के आदेश के अनुसार ही की जाती है।
पुराने IPC की जगह नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप बदलाव
CCA, 2024 में पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) और पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 से संबंधित संदर्भ मौजूद थे। नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद संशोधन के जरिए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अनुरूप धाराओं को शामिल करने की दिशा में बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य नए आपराधिक कानूनों के साथ CCA के प्रावधानों में कानूनी तालमेल स्थापित करना है।
किन मामलों में CCA का दायरा बढ़ेगा?
1. जमीन पर अवैध कब्जा या किसी को संपत्ति से गैरकानूनी तरीके से बेदखल करना
2.सार्वजनिक या निजी संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचाना
3.पेपर लीक और संगठित कदाचार
4. अवैध खनन
5. वन क्षेत्र एवं वन्यजीवों को व्यापक नुकसान
6. सोशल मीडिया पर जाति, धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर घृणा/शत्रुता फैलाना
7. मानव तस्करी
8. विस्फोटक पदार्थों से जुड़े गंभीर अपराध
बिहार में CCA का नया संदेश
बिहार सरकार के इस संशोधन का व्यापक संदेश यही है कि अपराध नियंत्रण की रणनीति अब केवल पारंपरिक आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगी। जमीन कब्जाने वाले संगठित गिरोह, परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाले पेपर लीक नेटवर्क, अवैध खनन और डिजिटल माध्यम से सामाजिक तनाव पैदा करने वाली गतिविधियों को भी कानून के दायरे में लाने पर जोर दिया जा रहा है। बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2024 मूल रूप से 14 मार्च 2024 को प्रभावी हुआ था। गृह विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस कानून को दर्ज किया गया है।
निष्कर्ष
Bihar CCA Amendment 2026 को अपराध नियंत्रण की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर जमीन माफिया, पेपर लीक गिरोह, अवैध खनन और डिजिटल माध्यम से सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाले मामलों को CCA के दायरे में लाने से जिला प्रशासन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति पर CCA की कार्रवाई कानून में निर्धारित प्रक्रिया, तथ्यों और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर ही होगी।

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