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Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर, 15 जिलों में 49.36 लाख लोग प्रभावित, 37 टीमें राहत-बचाव में जुटीं

जागरण प्रभात। बिहार में बाढ़ का संकट एक बार फिर गंभीर रूप ले चुका है। बिहार और पड़ोसी देश नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले चार-पांच दिनों से लगातार हो रही बारिश का असर अब राज्य की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार राज्य के 15 जिलों में करीब 49.36 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। ताजा स्थिति में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों के 88 प्रखंडों और 575 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर बताया गया है।

गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में बाढ़ की सबसे बड़ी चिंता इस समय गंगा और उसकी सहायक नदियों के बढ़े हुए जलस्तर को लेकर है। अधिकारियों के मुताबिक कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। भागलपुर के सुल्तानगंज में सोमवार सुबह गंगा का जलस्तर 36.21 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से करीब 1.71 मीटर ऊपर था। वहीं, गंगा दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में, पुनपुन श्रीपालपुर में, बागमती बेनीबाद में और घाघरा दरौली में खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई। यही वजह है कि नदी किनारे रहने वाली आबादी में चिंता बढ़ी हुई है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच प्रशासन को तटबंधों, कटाव संभावित इलाकों और निचले क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

1,260 सामुदायिक रसोइयों से मिल रहा भोजन

बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर व्यवस्था की है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार प्रभावित इलाकों में 1,260 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा 13 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन राहत शिविरों में करीब 11,060 लोगों के रहने, भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। सामुदायिक रसोइयों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाया जा रहा है। बिहार में बाढ़ की स्थिति पिछले कुछ दिनों में लगातार बदली है। इससे पहले 12 सितंबर को करीब 47.92 लाख लोग प्रभावित बताए गए थे। इसके बाद प्रभावित आबादी का आंकड़ा बढ़कर 49.36 लाख तक पहुंच गया।

SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें मैदान में

संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान के लिए बड़ी संख्या में आपदा प्रतिक्रिया बलों को तैनात किया है। विभिन्न जिलों में SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें, यानी कुल 37 टीमें, राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और निचले इलाकों में जलस्तर की लगातार निगरानी करना है।

कोसी और गंडक के पानी पर भी नजर

बिहार में बाढ़ की स्थिति को समझने के लिए कोसी और गंडक नदियों के जलप्रवाह पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। वीरपुर स्थित कोसी बराज से पानी का बहाव सोमवार को 1.63 लाख क्यूसेक से अधिक दर्ज किया गया। इस वर्ष 20 जुलाई को कोसी बराज से अधिकतम जलप्रवाह करीब 2.55 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया था। इसी तरह वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया। अलग-अलग समय के आधिकारिक अपडेट में डिस्चार्ज के आंकड़े बदले हैं, इसलिए जलप्रवाह की स्थिति को लगातार निगरानी में रखा जा रहा है।

सितंबर की बारिश ने बढ़ाई मुश्किल

राज्य में सितंबर के दौरान हुई बारिश ने पहले से ऊफनाई नदियों की स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का असर भी बिहार की नदियों के जलस्तर पर पड़ रहा है। हालिया रिपोर्टों में मौसम कार्यालय के सितंबर वर्षा आंकड़ों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी दी गई है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में बाढ़ केवल स्थानीय बारिश का परिणाम नहीं है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाला पानी, नदियों का बढ़ा हुआ स्तर और गंगा के ऊंचे जलस्तर के कारण सहायक नदियों की निकासी प्रभावित होना भी स्थिति को गंभीर बना सकता है।

तेजस्वी यादव ने केंद्र पर लगाया भेदभाव का आरोप

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बाढ़ राहत को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, लेकिन केंद्र की ओर से राज्य के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा नहीं की गई है। तेजस्वी यादव ने गुजरात में बाढ़ के दौरान सहायता और बिहार की स्थिति की तुलना करते हुए केंद्र पर भेदभाव का आरोप लगाया और बिहार के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की। हालांकि, यह राजनीतिक आरोप है और इसे सरकार के आधिकारिक रुख से अलग समझना जरूरी है।

आज भी चुनौती बड़ी, प्रशासन की नजर जलस्तर पर

बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या करीब 50 लाख तक पहुंचने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती राहत व्यवस्था को लगातार बनाए रखना है। एक तरफ सामुदायिक रसोई और राहत शिविरों के जरिए लोगों तक मदद पहुंचाई जा रही है, तो दूसरी तरफ NDRF और SDRF की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं। गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा जैसी नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। आने वाले घंटों में जलस्तर में कमी आती है या फिर नए क्षेत्रों में पानी फैलता है, यह स्थानीय बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी पर काफी हद तक निर्भर करेगा।

फिलहाल बिहार के 15 जिलों में करीब 49.36 लाख लोगों का बाढ़ से प्रभावित होना इस आपदा की गंभीरता को दर्शाता है। राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रशासन की चुनौती अब प्रभावित आबादी तक भोजन, चिकित्सा, सुरक्षित आवास तथा अन्य जरूरी सुविधाएं लगातार पहुंचाने की है।

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