जागरण प्रभात। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) की इमरजेंसी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। गंभीर मरीजों को समय पर प्राथमिकता के साथ इलाज उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल प्रशासन ट्रायज सिस्टम को व्यवस्थित तरीके से लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत मरीज की गंभीरता का आकलन करने के बाद उसे लाल, पीले या हरे रंग के बेड पर रखा जाएगा। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों का इलाज केवल उनके पहुंचने के क्रम के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी चिकित्सकीय गंभीरता के अनुसार शुरू हो। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नई व्यवस्था सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू किए जाने की तैयारी है।
इमरजेंसी पहुंचते ही होगा मरीज का ट्रायज
पीएमसीएच की नई इमरजेंसी व्यवस्था में मरीज के अस्पताल पहुंचने के बाद उसे सीधे सामान्य बेड पर भेजने के बजाय पहले ट्रायज में ले जाया जाएगा। यहां चिकित्सकीय टीम मरीज की स्थिति का प्रारंभिक आकलन करेगी। मरीज की बीमारी, चोट, सांस लेने में परेशानी, रक्तचाप, चेतना की स्थिति और अन्य जरूरी चिकित्सकीय संकेतों को देखते हुए उसकी प्राथमिकता तय की जाएगी। इसके बाद उसे संबंधित रंग के बेड पर शिफ्ट किया जाएगा। इस व्यवस्था का मकसद खास तौर पर उन मरीजों की पहचान जल्दी करना है, जिन्हें उपचार में कुछ मिनट की भी देरी भारी पड़ सकती है।
लाल बेड: सबसे गंभीर मरीजों को मिलेगी पहली प्राथमिकता
लाल रंग का बेड उन मरीजों के लिए होगा जिनकी स्थिति अत्यधिक गंभीर होगी और जिन्हें तत्काल जीवनरक्षक उपचार की आवश्यकता होगी। ऐसे मरीजों को ट्रायज के बाद बिना अनावश्यक इंतजार के उपचार उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। गंभीर दुर्घटना, अत्यधिक अस्वस्थ मरीज या ऐसी स्थिति जिसमें तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप जरूरी हो, उसे इस श्रेणी में रखा जा सकता है। इस व्यवस्था से डॉक्टरों और नर्सिंग टीम को भी तुरंत पता चल सकेगा कि इमरजेंसी में किस मरीज को सबसे पहले देखना है।
पीला बेड: गंभीर लेकिन थोड़ी प्रतीक्षा संभव
पीले रंग का बेड ऐसे मरीजों के लिए होगा जिनकी स्थिति गंभीर है, लेकिन उन्हें लाल श्रेणी के मरीजों की तरह उसी क्षण जीवनरक्षक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।इन मरीजों का भी प्राथमिकता के आधार पर उपचार किया जाएगा। हालांकि, उनकी स्थिति को लगातार निगरानी में रखा जाएगा ताकि हालत बिगड़ने पर उनकी श्रेणी और उपचार प्राथमिकता तुरंत बदली जा सके।
हरा बेड: सामान्य या कम गंभीर मरीजों के लिए
हरे रंग के बेड पर ऐसे मरीजों को रखा जाएगा जिनकी समस्या अपेक्षाकृत कम गंभीर होगी और जिन्हें तत्काल जीवनरक्षक उपचार की आवश्यकता नहीं होगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार ऐसे मरीजों में कई ऐसे हो सकते हैं जिनका इलाज सामान्य प्रक्रिया के तहत किया जा सके और जरूरत पड़ने पर उन्हें कुछ समय बाद डिस्चार्ज भी किया जा सके।इससे गंभीर मरीजों के लिए इमरजेंसी की उपलब्ध चिकित्सकीय क्षमता और बेड अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
ट्रायज में 24 घंटे विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी
पीएमसीएच प्रशासन की योजना के अनुसार ट्रायज व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ विभागों के चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। ट्रायज में हड्डी रोग, न्यूरो सर्जरी, मेडिसिन और क्रिटिकल केयर से जुड़े चिकित्सकों की 24 घंटे मौजूदगी की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा ट्रॉमा सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन तथा प्लास्टिक एवं बर्न सर्जन जैसी विशेषज्ञ सेवाओं को भी जरूरत के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि मरीज की गंभीर स्थिति सामने आते ही संबंधित विशेषज्ञ को उपचार प्रक्रिया में जल्दी शामिल किया जा सके।
हर दिन आते हैं गंभीर मरीज, रेफरल का भी रहता है दबाव
पीएमसीएच बिहार के सबसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल है। यहां राज्य के अलग-अलग जिलों से गंभीर मरीज रेफर होकर पहुंचते हैं। इमरजेंसी में रोजाना आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जिन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि इमरजेंसी में मरीजों की प्राथमिकता तय करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। सामान्य व्यवस्था में सभी मरीजों को एक जैसी कतार या बेड व्यवस्था मिलने पर गंभीर मरीजों की पहचान और उपचार में समय लग सकता है। रंग आधारित ट्रायज व्यवस्था इसी चुनौती को कम करने की कोशिश है।
पीएमसीएच में नई इमरजेंसी व्यवस्था का व्यापक बदलाव
पीएमसीएच में यह बदलाव केवल रंगों के आधार पर बेड निर्धारित करने तक सीमित नहीं है। अस्पताल में नए भवन और आधुनिक सुविधाओं को शुरू करने की प्रक्रिया भी चल रही है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार 500 बेड क्षमता वाला नया ब्लॉक तैयार हो चुका है और सितंबर के अंतिम सप्ताह तक इसे शुरू करने की तैयारी है। इसमें ओपीडी, इमरजेंसी, ट्रायज, जांच और दवा वितरण जैसी सुविधाओं को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने की योजना है। बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में बेड की उपलब्धता की रियल-टाइम जानकारी, रेफरल सिस्टम और एंबुलेंस सेवाओं को तकनीकी नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। PMCH समेत प्रमुख अस्पतालों को पायलट परियोजना में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
AIIMS पटना में भी है रेड-येलो-ग्रीन व्यवस्था
रंग आधारित ट्रायज व्यवस्था कोई बिल्कुल नई चिकित्सा अवधारणा नहीं है। पटना एम्स की आधिकारिक जानकारी के अनुसार उसके इमरजेंसी क्षेत्र को मरीज की गंभीरता के आधार पर रेड, येलो और ग्रीन एरिया में विभाजित किया गया है।AIIMS पटना के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभाग में भी रेड, येलो और ग्रीन जोन की व्यवस्था बताई गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आपातकालीन चिकित्सा में मरीज की गंभीरता के अनुसार प्राथमिकता तय करना एक स्थापित व्यवस्था है। अब इसी तरह की प्राथमिकता आधारित व्यवस्था को पीएमसीएच की इमरजेंसी में अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
क्या होगा मरीजों और परिजनों को फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीज की गंभीरता जल्दी सामने आ सकेगी। इससे अत्यधिक गंभीर मरीजों को सामान्य मरीजों के साथ एक ही प्राथमिकता में रखने की समस्या कम हो सकती है। दूसरा फायदा यह होगा कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मरीज की स्थिति के अनुसार काम करने में आसानी होगी। लाल श्रेणी के मरीज पर तत्काल ध्यान, पीले मरीज पर प्राथमिकता के साथ उपचार और हरे मरीजों के लिए सामान्य प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी। इससे इमरजेंसी में भीड़ के बीच संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
अधीक्षक ने क्या कहा?
पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह के अनुसार अस्पताल में नया इमरजेंसी वार्ड इसी महीने शुरू करने की तैयारी है। ट्रायज में मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद उसे अलग-अलग रंगों के बेड उपलब्ध कराए जाएंगे। सबसे गंभीर मरीजों को लाल रंग के बेड पर रखा जाएगा, जबकि ऐसे मरीज जिन्हें इलाज के बाद कम समय में डिस्चार्ज किया जा सकता है, उन्हें हरे रंग के बेड की श्रेणी में रखा जाएगा।

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