google-site-verification: googlec54213cf79dac358.html google-site-verification: googlec54213cf79dac358.html google-site-verification: googlec54213cf79dac358.html Bihar Flood: गंगा का रौद्र रूप, टूटा पुराना बाढ़ रिकॉर्ड; छह नदियां उफान पर, राघोपुर बांध पर CM ने लिया बड़ा फैसला

Bihar Flood: गंगा का रौद्र रूप, टूटा पुराना बाढ़ रिकॉर्ड; छह नदियां उफान पर, राघोपुर बांध पर CM ने लिया बड़ा फैसला

जागरण प्रभात। बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के उफान ने राज्य के बड़े हिस्से में बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच गया, जो 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से ऊपर है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही निचले इलाकों, दियारा क्षेत्रों और तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। जल संसाधन विभाग ने स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को तटबंधों की लगातार निगरानी, संवेदनशील इलाकों में गश्ती और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

पटना में गंगा ने बढ़ाई चिंता, गांधी घाट पर HFL पार

पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। गांधी घाट पर नदी 50.57 मीटर तक पहुंच गई है, जबकि 2016 का उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर था। जल संसाधन विभाग ने जलस्तर में आगे भी वृद्धि की आशंका जताई है। बख्तियारपुर में गंगा का पानी सड़क के करीब पहुंच गया है। मोकामा के दियारा क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी निकलकर एनएच-31 तक पहुंचने की स्थिति बनी है। ऐसे में सड़क संपर्क प्रभावित होने के साथ ग्रामीण इलाकों में जरूरी सामान और पशुओं के चारे की समस्या गहराने लगी है। 

राघोपुर बांध पर पहुंचे CM सम्राट चौधरी, 24 घंटे निगरानी के निर्देश

बाढ़ और कटाव की गंभीर स्थिति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राघोपुर क्षेत्र पहुंचकर तटबंध और कटावरोधी कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को युद्धस्तर पर सुरक्षा कार्य जारी रखने और 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने गंगा में बढ़ते दबाव और धारा में बदलाव से पैदा हुई स्थिति पर अधिकारियों से जानकारी ली। सरकार की ओर से गंगा के साथ कोसी और गंडक के तटबंधों को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। राघोपुर में मुख्यमंत्री का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र में गंगा के कटाव से तटबंधों पर दबाव बढ़ा हुआ है।

सारण में NH-19 पर पानी, दिघवारा में तटबंध टूटने से तीन पंचायतें प्रभावित

सारण जिले में सिंगही के पास एनएच-19 पर करीब एक फीट पानी चढ़ने की स्थिति सामने आई है। दिघवारा क्षेत्र में माही नदी का दायां तटबंध करीब 12 मीटर टूटने से आसपास की तीन पंचायतें प्रभावित हुई हैं। बाढ़ के कारण सड़क और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर आवागमन बाधित है। कई जगह लोगों को नाव के सहारे आने-जाने की मजबूरी बनी हुई है।

बेगूसराय से भागलपुर तक बाढ़ का असर

बेगूसराय जिले के नगर निगम क्षेत्र सहित आठ प्रखंडों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। दूसरी ओर भागलपुर के शहरी क्षेत्रों के कई मोहल्लों में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन परिसर, लालबाग स्थित प्रोफेसर कॉलोनी और छात्रावासों तक पानी पहुंचने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। भागलपुर क्षेत्र में राघोपुर के साथ-साथ तटवर्ती इलाकों में कटाव का खतरा भी बना हुआ है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जा रही है।

रेलवे ट्रैक तक पहुंचा पानी, ट्रेनों की रफ्तार पर लगी रोक

बाढ़ का असर रेल परिचालन पर भी दिखाई दे रहा है। साहिबगंज-भागलपुर-जमालपुर रेलखंड के कुछ हिस्सों में पानी का दबाव बढ़ने के बाद सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों की गति सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखने का अलर्ट जारी किया गया है। जलस्तर बढ़ने के साथ रेलवे पुलों और उनके आसपास के हिस्सों की निगरानी बढ़ाई गई है। इससे यात्रियों को भी यात्रा के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

खगड़िया में 24 घंटे में 34 सेंटीमीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर

खगड़िया में गंगा के जलस्तर में महज 24 घंटे के दौरान 34 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। जलस्तर में इस तेजी ने नदी किनारे बसे गांवों में चिंता बढ़ा दी है। दियारा इलाकों में पहले से ही आवागमन और दैनिक जरूरतों की समस्या बनी हुई है। पानी बढ़ने के साथ पशुओं के लिए चारा जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

मधेपुरा और समस्तीपुर में भी बाढ़ का फैलाव

मधेपुरा में कोसी की बाढ़ का असर चौसा और आलमनगर प्रखंडों में दिखाई दे रहा है। चौसा की पांच और आलमनगर की तीन पंचायतें प्रभावित बताई गई हैं। समस्तीपुर के दियारा क्षेत्र की करीब 15 पंचायतों में गंगा का पानी प्रवेश कर चुका है। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आवागमन, पशुओं के चारे और खाद्य सामग्री की उपलब्धता बनी हुई है। बाढ़ के दौरान प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे नदी, नहर और तेज बहाव वाले बाढ़ के पानी में जाने से बचें।

बिहार में राहत-बचाव के लिए NDRF और SDRF की टीमें सक्रिय

बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार राज्य में NDRF और SDRF की कई टीमें तैनात हैं तथा बड़ी संख्या में सरकारी नावों को भी राहत एवं निकासी कार्य में लगाया गया है। पटना, भागलपुर, वैशाली और भोजपुर समेत संवेदनशील जिलों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई जैसी व्यवस्थाएं भी सक्रिय की गई हैं।

उत्तर प्रदेश में भी गंगा-सरयू का कहर

बिहार के साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ाई हैं। बलिया में गंगा और सरयू उफान पर हैं। मऊ, आजमगढ़ और गाजीपुर में भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर बताया गया है। लखीमपुर खीरी में शारदा, बहराइच में घाघरा, बाराबंकी में सरयू, गोंडा में घाघरा और अयोध्या में सरयू के बढ़े जलस्तर से कई गांव प्रभावित हैं। वाराणसी में जलस्तर में कमी के बावजूद घाटों और तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का असर बना हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण कर राहत शिविरों में पीड़ितों से मुलाकात की और अधिकारियों को राहत-बचाव कार्य तेज रखने के निर्देश दिए।

क्यों खतरनाक है इस बार का बाढ़ संकट?

बिहार में इस समय खतरा केवल एक नदी से नहीं है। गंगा के साथ कोसी, गंडक, सोन, पुनपुन और अन्य नदियों में जलस्तर बढ़ने से अलग-अलग नदी घाटियों में एक साथ दबाव बना हुआ है। यही वजह है कि पटना से भागलपुर और खगड़िया से मधेपुरा तक अलग-अलग इलाकों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब तटबंधों की सुरक्षा, कटाव पर नियंत्रण और दियारा क्षेत्रों में फंसे लोगों तक भोजन, पेयजल, दवा और पशुचारा पहुंचाना है।

प्रशासन की अगली चुनौती

जलस्तर बढ़ने की स्थिति में अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। तटबंधों पर दबाव, कटाव और निचले इलाकों में पानी का फैलाव प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। फिलहाल लोगों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और नदी या तेज बहाव वाले पानी के आसपास जाने से बचें।

Post a Comment

0 Comments