विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी ने विजिलेंस टीम के विश्वविद्यालय पहुंचने की पुष्टि की है। उनके अनुसार, चार सदस्यीय टीम विश्वविद्यालय आई है और संबंधित मामलों की फाइलों की जांच की जा रही है।
किन मामलों की हो रही जांच?
जानकारी के अनुसार, विजिलेंस जांच का मुख्य फोकस पूर्व कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही के कार्यकाल में सामने आई शिकायतों पर है। राजभवन सचिवालय को इस अवधि के दौरान विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं से संबंधित शिकायतें मिली थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।शिकायतों में वाहनों की खरीद, भवन निर्माण, सफाई व्यवस्था, नियुक्तियों और कॉलेजों को संबद्धता देने सहित कई मामलों का उल्लेख किया गया है। अगस्त 2026 में भी विजिलेंस टीम विश्वविद्यालय पहुंची थी। उस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ के साथ कई महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों की जांच की गई थी। उस जांच में निर्माण कार्य, टेंडर प्रक्रिया, भुगतान तथा अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जाने की जानकारी सामने आई थी।
प्रिंटिंग प्रेस और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े आरोप भी जांच के दायरे में
पहले की जांच के दौरान विश्वविद्यालय में अधिकृत प्रिंटिंग प्रेस को कथित रूप से नियमों के विपरीत भुगतान तथा सुरक्षा गार्डों की तैनाती से संबंधित शिकायतों की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा ऐसे कॉलेजों को संबद्धता दिए जाने की शिकायत भी जांच के दायरे में बताई गई थी, जिनके बारे में शिकायतकर्ता ने निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया था। वहीं, अगस्त में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक निर्माण कार्यों और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की गई थी। हालांकि, इन शिकायतों और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पटना हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी याचिका
मगध विश्वविद्यालय से संबंधित एक मामले में पटना हाईकोर्ट के 29 जून 2026 के आदेश में विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं, खरीद प्रक्रिया, टेंडर और अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया था। अदालत के रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप दर्ज हैं; इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में विजिलेंस की कार्रवाई जांच के स्तर पर है। किसी व्यक्ति या अधिकारी की जिम्मेदारी अथवा दोष तय होना जांच के निष्कर्ष और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
मंगलवार को अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ
जानकारी के मुताबिक विजिलेंस टीम मंगलवार को विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर सकती है। पूछताछ के दौरान संबंधित फाइलों, निर्णयों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल किए जाने की संभावना है।जांच टीम विभिन्न शाखाओं से संबंधित दस्तावेजों का मिलान भी कर सकती है। इसके माध्यम से यह देखा जा रहा है कि शिकायतों में उठाए गए बिंदुओं से जुड़े रिकॉर्ड और विश्वविद्यालय के उपलब्ध दस्तावेजों में क्या स्थिति है।
पहले भी हुई है विजिलेंस कार्रवाई
मगध विश्वविद्यालय में यह जांच पहली बार नहीं है। इससे पहले पूर्व कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद के कार्यकाल से जुड़े मामलों में भी विजिलेंस कार्रवाई हो चुकी है। अब प्रो. शशि प्रताप शाही के कार्यकाल से जुड़े मामलों की जांच के कारण विश्वविद्यालय में एक बार फिर निगरानी एजेंसी की गतिविधियां तेज हुई हैं। अगस्त में हुई जांच के दौरान टीम ने संबंधित शाखाओं से रिकॉर्ड मांगे और कर्मचारियों से पूछताछ की थी। हालिया कार्रवाई को उसी जांच की आगे की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
जांच के निष्कर्ष पर टिकी नजर
मगध विश्वविद्यालय से जुड़े इन मामलों में अब सबसे महत्वपूर्ण बात विजिलेंस जांच के निष्कर्ष होंगे। फिलहाल सामने आई शिकायतों और आरोपों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है और किन मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विजिलेंस टीम को जांच में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही है। आने वाले दिनों में अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ तथा दस्तावेजों की जांच के आधार पर मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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