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Bihar Nyaya Mitra: दूसरों को न्याय दिलाने वालों ने सरकार से मांगा अपने लिए न्याय, मानदेय बढ़ाने की गुहार

जागरण प्रभात । बिहार में ग्राम कचहरी न्यायमित्रों के मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर बिहार के अलग-अलग जिलों से पहुंचे बड़ी संख्या में न्यायमित्रों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। ग्राम कचहरी न्यायमित्र संघ, बिहार के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में न्यायमित्रों ने लंबे समय से लंबित मानदेय वृद्धि को तत्काल मंजूरी देने के साथ-साथ संविदा कर्मियों से संबंधित चौधरी कमिटी की अनुशंसाओं को लागू करने की मांग उठाई।

न्यायमित्रों का कहना है कि वर्ष 2007 से ग्राम कचहरियों में सेवा दे रहे न्यायमित्रों को करीब 19 वर्षों की सेवा के बाद भी वर्तमान में सिर्फ ₹7,000 प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। संघ के अनुसार वर्ष 2015 के बाद मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच इतनी कम राशि में ग्राम कचहरी से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना बेहद मुश्किल हो गया है। न्यायमित्रों ने सरकार से मांग की है कि उनके वर्षों के अनुभव और जिम्मेदारियों को देखते हुए सम्मानजनक मानदेय निर्धारित किया जाए।

एक  जुलाई 2025 से मानदेय वृद्धि के पत्र को मंजूरी देने की मांग

गर्दनीबाग धरने में न्यायमित्रों की प्रमुख मांगों में 1 जुलाई 2025 से मानदेय वृद्धि से संबंधित पत्र को तत्काल मंजूरी देना शामिल है। संघ का कहना है कि मानदेय बढ़ाने को लेकर पंचायती राज विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया, लेकिन इसे अंतिम रूप से लागू किए जाने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। न्यायमित्रों ने सरकार से इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है, ताकि लंबे समय से ग्राम कचहरियों में सेवा दे रहे कर्मियों को आर्थिक राहत मिल सके।

चौधरी कमेटी की अनुशंसाएं लागू करने की मांग

मानदेय वृद्धि के अलावा न्यायमित्रों ने संविदा कर्मियों से संबंधित चौधरी कमेटी की अनुशंसाओं को शत-प्रतिशत लागू करने की मांग भी उठाई है। संघ का कहना है कि मंत्रिपरिषद से स्वीकृत अनुशंसाओं का लाभ संविदा कर्मियों को मिलना चाहिए। न्यायमित्रों का तर्क है कि ग्राम स्तर पर न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मियों को भी सेवा और दायित्व के अनुरूप आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

ग्राम कचहरी में क्या करते हैं न्यायमित्र?

ग्राम कचहरी की व्यवस्था में न्यायमित्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वे ग्राम कचहरी के सरपंच, पंच और सचिव को कानूनी मामलों में सलाह देने के साथ न्यायपीठ की कार्यवाही में सहयोग करते हैं। ग्रामीण स्तर पर लोगों को अपेक्षाकृत सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की व्यवस्था में भी न्यायमित्र सहयोग करते हैं।आंदोलन कर रहे न्यायमित्रों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उनके मानदेय में लंबे समय से अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री और पंचायती राज विभाग के सामने रखी जा चुकी हैं मांगें

ग्राम कचहरी न्यायमित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमा शंकर राय के अनुसार मानदेय वृद्धि समेत अन्य मांगों को लेकर संघ की ओर से मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री और विभागीय अधिकारियों के समक्ष कई बार मामला उठाया जा चुका है। संघ का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से मुलाकात करने के साथ-साथ सरकार को पत्र भेजकर भी समस्याओं की जानकारी दी गई। अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद न्यायमित्रों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

महिला न्यायमित्रों ने भी उठाई आवाज

गर्दनीबाग धरना स्थल पर महिला न्यायमित्रों ने भी मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर अपनी बात रखी। बरखा कुमार, सुनीता कुमारी, अर्चना कुमारी और प्रीति कुमारी समेत महिला न्यायमित्रों ने कहा कि मौजूदा मानदेय में वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना कठिन हो रहा है। उन्होंने सरकार से मानदेय में ऐसी वृद्धि की मांग की जिससे न्यायमित्रों को सम्मानजनक आर्थिक राहत मिल सके।

धरना स्थल पर न्यायमित्र की तबीयत बिगड़ी

धरना-प्रदर्शन के दौरान रोहतास जिले के काराकाट प्रखंड की ग्राम कचहरी चिक्सिल की न्यायमित्र रीना कुमारी की तबीयत बिगड़ गई। संघ के अनुसार, वह धरना स्थल पर बेहोश हो गईं। इसके बाद साथी न्यायमित्रों ने उन्हें गर्दनीबाग स्थित सरकारी चिकित्सालय पहुंचाया, जहां उनका इलाज कराया गया।घटना के बाद धरना स्थल पर मौजूद न्यायमित्रों में चिंता का माहौल बन गया।

तीसरे दिन बिहार के कई जिलों से पहुंचे न्यायमित्र

तीसरे दिन के आंदोलन में बिहार के विभिन्न जिलों से न्यायमित्र गर्दनीबाग पहुंचे। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष न्यायमित्र मौजूद रहे। आंदोलन में रमा शंकर राय, डॉ. उदय नारायण प्रसाद सिंह, नवल किशोर प्रसाद, बरखा कुमार, सुनीता कुमारी, अभय कुमार सिंह पटेल, अनीस सहाय, सकल कुमार, प्रभात कुमार यादव, संतोष कुमार यादव, मनोज कुमार गुप्ता, राजीव कुमार, संतोष ठाकुर, यतेन्द्र मोहन सिंह, रूपेश कुमार, किरण कुमार घोष, शत्रुघ्न सिंह, अनीता चौधरी, स्नेहलता कुशवाहा, बीरेंद्र कुमार कुशवाहा, अर्चना कुमारी उर्फ डॉली यादव, कुसुम गुप्ता, बेबी कुमारी, सत्या, भावना कुमारी, मोहम्मद अयुब, सीताराम शर्मा, रंजीत कुमार, राकेश कुमार, आलोक कुमार सिंह, मोहम्मद इमामुद्दीन, शाहिद अहमद, चंदन कुमार, रमेश मिश्रा, अर्चना सिंह, राजीव कुमार, राहुल कुमार, कन्हाई कुमार, योगेंद्र बैठा, रामजी सिंह, दिलीप कुशवाहा, राम बाबू पटेल, प्रज्ञा, हेना खातून, हरे राम सिंह, पुनम गुप्ता, जहां आरा, रीना कुमारी, सरिता कुमारी, कुमार प्रशांत, कुमारी विभा चौधरी, मीना कुमारी, उपेन्द्र नाथ वर्मा, अभिनाश कुमार, मोहम्मद असलम, रवि रंजन तिवारी, ऋषि यादव, विभीषण पासवान, विजय कुमार सिंह, सुनील सिंह, रिया दयाल और संजय कुमार महतो समेत बड़ी संख्या में न्यायमित्र शामिल रहे।

अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर

गर्दनीबाग में दूसरे दिन भी जारी धरने के बाद अब न्यायमित्रों की नजर सरकार और पंचायती राज विभाग के अगले कदम पर है। संघ ने स्पष्ट किया है कि उसकी सबसे प्रमुख मांग सम्मानजनक मानदेय वृद्धि है। इसके साथ ही 1 जुलाई 2025 से प्रस्तावित मानदेय वृद्धि संबंधी पत्र को मंजूरी देने और चौधरी कमिटी की अनुशंसाओं को लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। न्यायमित्रों का कहना है कि वे लंबे समय से ग्रामीण न्याय व्यवस्था का हिस्सा हैं और सरकार को उनकी आर्थिक स्थिति तथा भविष्य की सेवा व्यवस्था पर जल्द ठोस निर्णय लेना चाहिए।

न्यायमित्रों की प्रमुख मांगें 

  • मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए।
  • 1 जुलाई 2025 से मानदेय वृद्धि संबंधी पत्र को मंजूरी दी जाए।
  • संविदा कर्मियों से संबंधित चौधरी कमिटी की अनुशंसाएं लागू की जाएं।
  • वर्षों से सेवा दे रहे न्यायमित्रों को आर्थिक सुरक्षा दी जाए।
  • ग्राम कचहरी से जुड़े कर्मियों की सेवा व्यवस्था पर सरकार स्पष्ट निर्णय ले।

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