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हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: विश्वसनीयता से AI तक, सूरत में भविष्य की पत्रकारिता पर मंथन

जागरण प्रभात। पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सूरत में पत्रकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण मंथन हुआ। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा संचालित नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक एवं बीमा), सूरत और वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदी पत्रकारिता : गौरवशाली यात्रा, वर्तमान चुनौतियाँ तथा भविष्य’ विषय पर विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें पत्रकारिता विभाग के करीब 150 विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। समिति के सदस्य सचिव एवं मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) संजीव पाण्डेय ने नराकास की गतिविधियों की जानकारी दी। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. किशोर सिंह चावड़ा सहित सूरत के वरिष्ठ संपादकों और पत्रकारों ने बदलते मीडिया परिदृश्य पर अपने विचार रखे।

‘संदेश’ के मुख्य संपादक कृष्णकांत उनडकट ने पत्रकारिता में विश्वसनीयता को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए ‘उदंत मार्तंड’ से शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता की यात्रा को रेखांकित किया। गुजरात गार्डियन के संपादक मनोज मिस्त्री ने पत्रकारिता को सामाजिक दायित्व बताते हुए युवाओं से तथ्यों और सच्चाई को निर्भीकता से सामने लाने का आह्वान किया।

‘धबकार’ के संपादक नरेश वारिया ने पत्रकार को समाज का आईना बताया। ‘गुजरातमित्र’ के संपादक धर्मेश कुकड़िया ने निरंतर अध्ययन, मेहनत और स्वच्छ छवि को पत्रकारिता की सफलता का आधार बताया।

‘लोकतेज’ के संपादक कुलदीप सनाढ्य ने दक्षिण गुजरात में हिंदी पत्रकारिता के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पत्रकारिता के सामने चुनौती भी हैं और नए अवसर भी। उन्होंने विद्यार्थियों से दबाव और प्रलोभन से मुक्त रहकर तथ्यपरक एवं जिम्मेदार पत्रकारिता करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया। गृह मंत्रालय के सहायक निदेशक (राजभाषा) प्रमोद संगोले, एसबीआई के उप महाप्रबंधक एवं नराकास अध्यक्ष राजेश कुमार तथा एसबीआई के रीजनल मैनेजर विकास कुमार समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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