जागरण प्रभात। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच जारी राजनीतिक विवाद अब संसद तक पहुंचता दिख रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने मंगलवार (29 सितंबर) को स्पष्ट किया कि वह विपक्षी गठबंधन 'INDIA' का हिस्सा नहीं होने के बावजूद संसद में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए लाए जाने वाले प्रस्ताव का समर्थन करेगी। द्रमुक प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ खड़ी रहेगी।
एलंगोवन ने संवाददाताओं से कहा कि द्रमुक 'INDIA' गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में यदि विपक्ष की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी। उन्होंने इसके पीछे द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन के पहले दिए गए सार्वजनिक बयान का भी हवाला दिया।
स्टालिन पहले ही कर चुके हैं ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने 23 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। स्टालिन ने उस समय कहा था कि ज्ञानेश कुमार को अब पद पर बने नहीं रहना चाहिए। द्रमुक प्रमुख ने यह भी कहा था कि पार्टी और अन्य विपक्षी दल इससे पहले भी उनके खिलाफ हटाने की प्रक्रिया से संबंधित कदम उठा चुके हैं।
संसद में विपक्ष के प्रस्ताव को मिलेगा द्रमुक का समर्थन
टीकेएस एलंगोवन के मंगलवार के बयान से यह साफ हो गया है कि द्रमुक इस मुद्दे पर संसद के भीतर विपक्षी दलों के साथ खड़ी होगी। हालांकि, पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका यह रुख उसे 'INDIA' गठबंधन का हिस्सा नहीं बनाता।द्रमुक का कहना है कि संसद में भाजपा के खिलाफ विपक्ष किसी मुद्दे पर कदम उठाता है तो पार्टी उस मुद्दे पर उसका समर्थन करेगी। इस तरह ज्ञानेश कुमार को हटाने का मुद्दा विपक्षी दलों के बीच अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के बावजूद साझा मुद्दे के रूप में सामने आ रहा है।
30 सितंबर की बैठक पर भी बनी हुई है नजर
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों की गतिविधियां आने वाले दिनों में और तेज हो सकती हैं। रिपोर्टों के अनुसार 30 सितंबर को दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा होनी है। द्रमुक इस बैठक में शामिल नहीं हो रही है। मंगलवार को पार्टी ने इसके लिए कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक मतभेदों को प्रमुख वजह बताया। ताजा रिपोर्ट के अनुसार द्रमुक ने कहा है कि वह अब विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है और कांग्रेस के साथ तमिलनाडु में बने राजनीतिक समीकरणों को लेकर उसकी आपत्ति है।
कांग्रेस और TVK को लेकर द्रमुक ने साधा निशाना
एलंगोवन ने कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के बीच बने राजनीतिक समीकरणों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने TVK के साथ खड़े होने का फैसला किया है, जबकि द्रमुक के साथ उसका गठबंधन नहीं है। इसी वजह से द्रमुक कांग्रेस की ओर से बुलाई गई बैठक में शामिल होने के पक्ष में नहीं है। द्रमुक नेता ने कांग्रेस के इस राजनीतिक फैसले को 'गलती' भी बताया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस द्रमुक के साथ नहीं है तो उनकी पार्टी कांग्रेस की ओर से बुलाई गई बैठक में कैसे शामिल हो सकती है।
अखिलेश यादव का भी उठाया मुद्दा
एलंगोवन ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बैठक में शामिल नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अखिलेश यादव भी द्रमुक की तरह बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अंतर सामने आता है—द्रमुक INDIA गठबंधन से अलग रहने की बात स्पष्ट रूप से कह रही है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव के मुद्दे पर विपक्ष के साथ समर्थन का रुख अपना रही है।
क्यों अहम है ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विवाद?
ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद मुख्य रूप से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया से जुड़े आरोपों के कारण बढ़ा है। विपक्षी दलों ने आयोग के फैसलों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए हैं। हाल में आई रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों को लेकर दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया था। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से निर्णय प्रक्रिया को लेकर अलग रुख सामने आया है। इसलिए इस पूरे मामले में विपक्ष के आरोपों और निर्वाचन आयोग के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।
द्रमुक के रुख से बदले समीकरण
द्रमुक का ताजा रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी एक तरफ INDIA गठबंधन से दूरी बनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने के विपक्षी प्रयास का समर्थन करने की घोषणा कर रही है। यानी तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और TVK को लेकर द्रमुक के मतभेद और राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष के साथ उसका रुख—दोनों अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों में दिखाई दे रहे हैं। आने वाले संसदीय घटनाक्रम में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने के मुद्दे पर किस तरह की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाता है और अलग-अलग विपक्षी दल उसमें किस स्तर तक साथ आते हैं।

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