जागरण प्रभात। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान अर्णब के प्रभाव से ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। गंजाम और गजपति में स्थिति विशेष रूप से गंभीर रही, जहां सैकड़ों गांव प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के पानी में घरों के डूबने और कई इलाकों का संपर्क टूटने के बाद बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। राज्य सरकार के मुताबिक, अब तक 59,028 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ और अग्निशमन विभाग की कुल 313 टीमें तैनात की गई हैं। उधर, बहुदा नदी का जलस्तर बढ़ने से रेल परिचालन प्रभावित हुआ है। बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी मौसम की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
ओडिशा के नौ जिलों में बाढ़ से बिगड़े हालात
चक्रवात अर्णब के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश हुई, जिसके कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। गंजाम और गजपति के अलावा मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, नबरंगपुर, कालाहांडी, नुआपाड़ा और कंधमाल जिलों में भी बारिश का व्यापक असर देखा गया। गंजाम जिले में करीब 299 गांव और गजपति में 711 गांव प्रभावित होने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। कई स्थानों पर बाढ़ का पानी घरों में घुस गया, जबकि कुछ इलाकों में सड़क संपर्क टूटने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अभियान तेज किया। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
59,028 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, गंजाम में 11,882 लोगों का रेस्क्यू
चक्रवात से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता रही। अधिकारियों के अनुसार, ओडिशा में कुल 59,028 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
प्रमुख जिलों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- गजपति: 17,441 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
- मलकानगिरी: 15,477 लोगों को निकाला गया।
- गंजाम: 11,882 लोगों का रेस्क्यू किया गया।
- नबरंगपुर: 10,519 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में रखने के साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। गंजाम जिले के कुछ गांवों में बाढ़ का पानी भरने से लोग फंस गए थे। तेज बहाव के कारण बचाव दलों को कुछ स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हुई। ऐसे क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हवाई बचाव की तैयारी की गई।
राहत अभियान में 313 टीमें तैनात
- ओडिशा सरकार ने बचाव एवं राहत अभियान के लिए विभिन्न आपदा प्रबंधन एजेंसियों की 313 टीमें लगाई हैं।
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 9 टीमें।
- ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की 60 टीमें।
- अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग की 244 टीमें।
गंजाम जिले में 45 ओडीआरएएफ और सात एनडीआरएफ टीमें तैनात की गई हैं। गजपति जिले में 12 ओडीआरएएफ और एक एनडीआरएफ टीम बचाव अभियान में जुटी है। अग्निशमन विभाग की टीमें जलभराव वाले इलाकों में राहत पहुंचाने, सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने और संपर्क बहाल करने में मदद कर रही हैं। प्रशासन का ध्यान प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ बिजली, पेयजल और सड़क जैसी आवश्यक सेवाओं को जल्द बहाल करने पर है।
गजपति में NH-326 क्षतिग्रस्त, 2,328 लोगों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी
भारी बारिश और तेज बहाव का असर सड़क परिवहन पर भी पड़ा है। गजपति जिले के मोहना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-326 का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई है। गंजाम जिले के कुछ गांवों में बाढ़ का पानी भरने के कारण लोगों का बाहरी इलाकों से संपर्क बाधित हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, गंजाम के 70 गांवों में फंसे 2,328 लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हवाई बचाव अभियान की तैयारी की गई। प्रशासन प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की पहचान कर रहा है। जिन स्थानों तक नाव या सड़क के रास्ते पहुंचना मुश्किल है, वहां जरूरत के अनुसार हेलीकॉप्टर की सहायता लेने की व्यवस्था की जा रही है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे प्रभावित क्षेत्रों में जाने से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लें और प्रशासन की चेतावनी को नजरअंदाज न करें।
बहुदा नदी उफान पर, हावड़ा-चेन्नई रेल मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित
चक्रवात अर्णब से हुई भारी बारिश के कारण ओडिशा के गंजाम जिले में बहुदा नदी का जलस्तर बढ़ गया। नदी का पानी रेलवे पुलों के पास खतरे के निशान तक पहुंचने के बाद रेल परिचालन की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए गए।रिपोर्टों के अनुसार, हावड़ा-चेन्नई मार्ग पर 36 ट्रेनें रद की गईं, 30 ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया और आठ ट्रेनों के परिचालन समय में बदलाव हुआ। ईस्ट कोस्ट रेलवे और साउथ कोस्ट रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित रेलखंडों पर आवश्यक कदम उठाए। रद या परिवर्तित की गई ट्रेनों में कुछ प्रमुख लंबी दूरी की सेवाएं भी शामिल रहीं। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रभावित रेलखंडों पर परिचालन सामान्य करने से पहले जलस्तर और पटरियों की सुरक्षा का आकलन किया जाएगा।
यात्रियों के लिए जरूरी सूचना: यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस, रूट और प्रस्थान समय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या पूछताछ सेवा से जरूर जांच लें।
खराब मौसम से विमान सेवा भी प्रभावित
चक्रवात के प्रभाव से बारिश और तेज हवाओं ने हवाई सेवाओं को भी प्रभावित किया। गुरुवार को कोलकाता से रांची आने वाला इंडिगो का विमान संख्या 6E 7463 खराब मौसम के कारण बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर नहीं उतर सका। विमान लगभग 20 मिनट तक आसमान में चक्कर लगाने के बाद वापस कोलकाता लौट गया। खराब दृश्यता और प्रतिकूल मौसम के कारण विमान परिचालन में बदलाव करना पड़ा। यात्रियों को सलाह दी गई है कि एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति संबंधित एयरलाइन से जांच लें।
आंध्र प्रदेश में मालवाहक जहाज के चालक दल का बचाव
चक्रवात के दौरान समुद्र में खराब मौसम के कारण आंध्र प्रदेश के तट के पास एक मालवाहक जहाज भी फंस गया। जहाज का नाम 'सिग्मा पर्ल' बताया गया है, जो मार्शल आइलैंड्स के झंडे के तहत संचालित था। भारतीय तटरक्षक बल ने जहाज पर मौजूद चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, 20 सदस्यों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाला गया, जबकि बाकी सात नाविकों को निकालने की प्रक्रिया जारी थी। यह घटना बताती है कि चक्रवात के दौरान समुद्री परिवहन और जहाजों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन जाती है।
अमित शाह ने ओडिशा समेत प्रभावित राज्यों को मदद का भरोसा दिया
चक्रवात से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से बात कर हालात की जानकारी ली और केंद्र की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शाह ने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से भी संपर्क कर सहायता का आश्वासन दिया। राज्य सरकारें आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ मिलकर प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और आवश्यक सेवाओं को बहाल करने में जुटी हैं।
बिहार में बारिश, बंगाल में भारी वर्षा की आशंका
चक्रवात के प्रभाव से बिहार में भी कई स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश होने की जानकारी सामने आई। पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में मौसम की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हुई। वहीं, पश्चिम बंगाल में कोलकाता, हावड़ा, हुगली और उत्तर 24 परगना समेत कई क्षेत्रों में भारी बारिश की आशंका जताई गई थी। मौसम की स्थिति समय के साथ बदल सकती है। इसलिए बिहार, पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों के लोगों को भारत मौसम विज्ञान विभाग की नवीनतम चेतावनियां देखनी चाहिए।
मौसम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट: https://mausam.imd.gov.in/
बस्तर के आसमान में लाल-गुलाबी रंग क्यों दिखाई दिया?
चक्रवात के प्रभाव के दौरान छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में शाम के समय आसमान लाल और गुलाबी दिखाई देने का वीडियो भी चर्चा में रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्यास्त के आसपास बादलों पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों के कारण आकाश में लाल, नारंगी और गुलाबी रंग दिखाई दे सकते हैं। वातावरण में प्रकाश का प्रकीर्णन, बादलों की ऊंचाई और मौसम की परिस्थितियां इस तरह के दृश्य को प्रभावित करती हैं। हालांकि, किसी खास वीडियो के पीछे के कारण की पुष्टि के लिए उसके स्थान, समय और स्थानीय मौसम की जानकारी जरूरी होती है।
चक्रवात के बीच ओडिशा में 931 बच्चों का जन्म, कुछ के नाम रखे अर्णब और वर्षा
चक्रवात के दौरान राहत और बचाव के बीच ओडिशा से एक भावनात्मक खबर भी सामने आई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के अनुसार, चक्रवात से पहले 2,245 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया गया था। इनमें से 931 महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, माताएं और नवजात सुरक्षित थे। कुछ परिवारों ने अपने बच्चों के नाम चक्रवात और मौसम से प्रेरित होकर रखे। लड़कों के नाम अर्णब, तूफान और पवन जैसे रखे गए, जबकि कुछ बच्चियों के नाम वर्षा और बतासी रखे गए। इससे पहले आंध्र प्रदेश में भी चक्रवात से पहले 3,100 गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में पहुंचाया गया था। वहां 367 प्रसव दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई। प्राकृतिक आपदा के दौरान गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल रहा।
चक्रवात के दौरान आम लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
चक्रवात और बाढ़ के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए:
- मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें।
- बाढ़ के पानी में पैदल या वाहन से जाने की कोशिश न करें।
- बिजली के टूटे तारों और जलभराव वाले विद्युत उपकरणों से दूर रहें।
- जरूरत पड़ने पर प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित स्थानों पर जाएं।
- जरूरी दवाइयां, पीने का पानी, पहचान पत्र और मोबाइल फोन अपने पास रखें।
- ट्रेन या विमान से यात्रा करने से पहले परिचालन की स्थिति जांचें।
- सोशल मीडिया पर वायरल खबरों को आधिकारिक पुष्टि के बिना साझा न करें।

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