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Bihar Teacher Leave Rules: महिला शिक्षकों को 730 दिन की छुट्टी, पुरुषों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश

जागरण प्रभात। बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अवकाश से जुड़े नियमों को समझना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। शिक्षा विभाग की अवकाश संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में शिशु देखभाल अवकाश (CCL), मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश, उपार्जित अवकाश और छुट्टी के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया का विवरण दिया गया है। नई व्यवस्था में आवेदन से लेकर मंजूरी और शिकायत के निपटारे तक की समय-सीमा तय की गई है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य अवकाश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और आवेदन लंबित रहने की समस्या को कम करना है। शिक्षकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ई-शिक्षाकोष पोर्टल के लीव मॉड्यूल से आवेदन करना होगा। हालांकि, किसी भी अवकाश का लाभ संबंधित नियमों, पात्रता और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।

महिला शिक्षकों को 730 दिन का CCL

बिहार शिक्षा विभाग की अवकाश संबंधी SOP में पात्र महिला शिक्षकों और कर्मियों के लिए शिशु देखभाल अवकाश (Child Care Leave) का प्रावधान शामिल है। इसके तहत अधिकतम 730 दिनों तक अवकाश की सुविधा बताई गई है। यह लाभ अधिकतम दो बच्चों की देखभाल के लिए मान्य होगा। इस अवकाश के लिए बच्चे की उम्र 18 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। महिला कर्मी की अपनी उम्र के संबंध में कोई सीमा नहीं बताई गई है। एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम तीन बार CCL स्वीकृत किए जाने का प्रावधान है। एक बार में कम से कम 15 दिनों का अवकाश लेना होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि 730 दिन की कुल सीमा का अर्थ यह नहीं है कि हर आवेदन पर इतनी लंबी छुट्टी स्वतः मिल जाएगी। अवकाश की अवधि, पात्रता और मंजूरी संबंधित नियमों के अनुसार तय होगी।

महिला शिक्षकों को 180 दिन का मातृत्व अवकाश

महिला शिक्षकों के लिए मातृत्व अवकाश भी महत्वपूर्ण प्रावधान है। पात्र महिला सरकारी कर्मियों को नियमानुसार 180 दिनों तक मातृत्व अवकाश मिल सकता है। इस दौरान आवेदन करते समय निर्धारित दस्तावेज और आवश्यक विवरण उपलब्ध कराने होंगे। मातृत्व अवकाश की पात्रता और स्वीकृति संबंधित सेवा नियमों के अनुसार होगी। इसलिए आवेदन करने से पहले शिक्षक को अपने सेवा रिकॉर्ड और लागू नियमों की जानकारी जांच लेनी चाहिए।

दस्तावेज अपलोड करने होंगे

बच्चे के जन्म के समय पुरुष शिक्षकों के लिए पितृत्व अवकाश का प्रावधान भी है। उपलब्ध SOP संबंधी विवरण के अनुसार, पात्र पुरुष शिक्षक 15 दिनों के पितृत्व अवकाश के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस अवकाश में नियमानुसार पूरा वेतन देय होगा। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। आवेदन के साथ मांगे गए दस्तावेज अपलोड करने होंगे और सक्षम अधिकारी से स्वीकृति लेनी होगी।

e-Shikshakosh से करना होगा छुट्टी का आवेदन

शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था में अवकाश आवेदन और उसकी स्वीकृति को ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया गया है। शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को ई-शिक्षाकोष पोर्टल के Leave Module के माध्यम से आवेदन करना होगा।

आवेदन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. ई-शिक्षाकोष पोर्टल या मोबाइल एप पर लॉगिन करें।
  2. Leave Module में जाकर अवकाश का प्रकार चुनें।
  3. छुट्टी की शुरुआत और समाप्ति की तारीख दर्ज करें।
  4. अवकाश लेने का कारण स्पष्ट रूप से लिखें।
  5. संबंधित श्रेणी के लिए जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
  6. आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति पोर्टल पर जांचते रहें।

आकस्मिक अवकाश को छोड़कर अन्य अवकाशों के लिए पहले स्वीकृति लेना जरूरी है। इसलिए केवल आवेदन जमा कर देने को छुट्टी की मंजूरी नहीं माना जाना चाहिए।

छुट्टी मंजूर करने के लिए तय हुई समय-सीमा

अवकाश आवेदन के निपटारे में देरी कम करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। उपलब्ध SOP विवरण के अनुसार, आकस्मिक अवकाश पर उसी दिन निर्णय लेना होगा, जबकि अन्य अवकाशों के लिए अधिकतम सात कार्यदिवस की समय-सीमा निर्धारित है। यदि निर्धारित अवधि में आवेदन पर निर्णय नहीं होता है, तो आवेदन स्वतः अगले सक्षम अधिकारी के पास अग्रसारित किए जाने का प्रावधान है। जिला शिक्षा पदाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तय की गई है। शिक्षकों के लिए जरूरी है कि आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति पर नजर रखें और किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

बिना मंजूरी छुट्टी लेने पर क्या होगी कार्रवाई?

शिक्षा विभाग की व्यवस्था में बिना स्वीकृति लगातार अनुपस्थित रहने को गंभीरता से लिया गया है। नियमों के विपरीत अनुपस्थिति की स्थिति में वेतन स्थगित किया जा सकता है और संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए किसी भी गैर-आकस्मिक अवकाश पर जाने से पहले आवेदन की स्वीकृति सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि आवेदन लंबित है, तो पोर्टल पर उसकी स्थिति और संबंधित अधिकारी के स्तर की जानकारी जांचनी चाहिए।

अवकाश से जुड़ी शिकायत कैसे करें?

यदि किसी शिक्षक का आवेदन निर्धारित समय में निपटाया नहीं जाता या अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया में परेशानी आती है, तो ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अवकाश संबंधी शिकायतों का निपटारा अधिकतम सात दिनों के भीतर करने का प्रावधान है। शिकायत दर्ज करते समय आवेदन संख्या, आवेदन की तारीख और समस्या का स्पष्ट विवरण देना उपयोगी होगा।

सरकारी ड्यूटी के बदले मिलेगा क्षतिपूर्ति अवकाश

कई बार शिक्षकों को जनगणना या अन्य सरकारी कार्यों के लिए निर्धारित छुट्टी के दिन भी ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में तय शर्तों और लागू नियमों के तहत क्षतिपूर्ति अवकाश (Compensatory Leave) दिया जा सकता है।इसका लाभ संबंधित सरकारी कार्य, ड्यूटी के प्रमाण और लागू नियमों के अनुसार मिलेगा। इसलिए छुट्टी के दिन की गई ड्यूटी का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए।

उपार्जित अवकाश की अधिकतम सीमा 300 दिन

उपार्जित अवकाश (Earned Leave) को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान है। उपलब्ध SOP विवरण के अनुसार, इसके अधिकतम संचय की सीमा 300 दिन निर्धारित की गई है। शिक्षकों को अपने अवकाश खाते और सेवा रिकॉर्ड की जांच करते रहना चाहिए, ताकि उपलब्ध अवकाश और उसकी शेष सीमा को लेकर कोई भ्रम न रहे।

पांच सितंबर के बाद ऑफलाइन आवेदन पर रोक

अवकाश आवेदन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए विभाग ने 5 सितंबर 2026 के बाद ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं करने का निर्देश दिया है। उपलब्ध निर्देश के अनुसार, इसके बाद अवकाश संबंधी आवेदन ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से ही करना होगा। यदि कोई अधिकारी भौतिक रूप से आवेदन स्वीकार करता है, तो इसे विभागीय निर्देशों की अवहेलना माना जा सकता है। इसलिए शिक्षकों को ऑनलाइन आवेदन और उसकी स्थिति का रिकॉर्ड रखना चाहिए।

बिहार के शिक्षकों के लिए क्या है सबसे जरूरी बात?

बिहार के सरकारी शिक्षकों के लिए अवकाश से संबंधित नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बातें हैं—CCL की पात्रता और अवधि, मातृत्व एवं पितृत्व अवकाश, ऑनलाइन आवेदन, स्वीकृति की समय-सीमा और शिकायत निवारण। इन नियमों की सही जानकारी रहने से आवेदन करते समय होने वाली गलतियों और अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है। शिक्षकों को सलाह है कि किसी विशेष अवकाश के लिए आवेदन करने से पहले शिक्षा विभाग की मूल SOP और अपने संवर्ग पर लागू सेवा नियमों का मिलान जरूर कर लें। अवकाश की अवधि, वेतन और पात्रता को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी नियमों और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के अनुसार ही होगा।

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