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Kolkata Durga Puja Stampede: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, छाती पर दबाव से दम घुटने की आशंका; बिहार के पिता-पुत्र समेत 19 की मौत

जागरण प्रभात। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। चोरबागान इलाके में हुए इस दर्दनाक हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई। पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, ज्यादातर मृतकों की मौत छाती पर अत्यधिक दबाव पड़ने से दम घुटने के कारण होने की आशंका है। मृतकों में बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी 38 वर्षीय अभिषेक श्रीवास्तव और उनके सात वर्षीय बेटे अयान्श कुमार श्रीवास्तव भी शामिल हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्टों में छाती पर दबाव पड़ने से दम घुटने को ज्यादातर मौतों का संभावित कारण माना गया है। भीड़ के अत्यधिक दबाव के कारण छाती का सामान्य रूप से फैलना मुश्किल हो सकता है, जिससे सांस लेने में गंभीर परेशानी होती है। अधिकारी के मुताबिक, कुछ मृतकों के शरीर में गंभीर आंतरिक चोटें भी मिली हैं। इनमें फेफड़े, पेट, यकृत, अग्न्याशय और सिर से जुड़ी चोटें शामिल हैं। कुछ लोगों की हाथ-पैर की हड्डियां टूट गई थीं, जबकि कई मामलों में मस्तिष्क के भीतर रक्तस्राव के संकेत मिले।

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, सात लोगों की मौत दम घुटने के साथ कई अंगों में चोट लगने के कारण हुई। कम से कम छह मामलों में पसलियां टूटकर फेफड़ों में धंस गई थीं। शुरुआती जांच में आंतरिक अंगों के फटने और रक्तस्राव को भी मौत का संभावित कारण बताया गया है।

दुर्गा पूजा देखने की इच्छा बनी आखिरी यात्रा

इस हादसे में मुजफ्फरपुर के अभिषेक श्रीवास्तव और उनके बेटे अयान्श की मौत ने बिहार में भी लोगों को झकझोर दिया है। अभिषेक लंबे समय से कोलकाता की भव्य दुर्गा पूजा देखने के इच्छुक थे। लेकिन जिस यात्रा से उन्हें उत्सव की यादें संजोने की उम्मीद थी, वही उनके परिवार के लिए कभी न भूलने वाला दुख बन गई। यह हादसा केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा। मृतकों में बचपन की दो करीबी सहेलियां, एक मां और उसका किशोर बेटा तथा एक दंपती भी शामिल हैं। कई लोग कोलकाता के अलग-अलग इलाकों और आसपास के जिलों से पूजा पंडाल देखने पहुंचे थे।

दो सहेलियों और मां-बेटे की भी गई जान

मृतकों में ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा बरनाली हलदर और उसकी करीबी दोस्त तानिया बिस्वास भी थीं। दोनों ने पहले साल्ट लेक के पूजा पंडालों में जाने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में मध्य और उत्तर कोलकाता जाने का फैसला किया। दोनों बचपन से एक-दूसरे की करीबी थीं। परिवार के एक सदस्य के अनुसार, तानिया की मां आमतौर पर उसे अकेले बाहर जाने देने में हिचकिचाती थीं, लेकिन इस बार उन्होंने अनुमति दे दी थी। परिजनों को अंदाजा नहीं था कि उनकी यह यात्रा इतनी दुखद साबित होगी। पूर्व बर्धमान की 37 वर्षीय तागर बेज और उनके 14 वर्षीय बेटे संदीप बेज की भी हादसे में मौत हो गई। वहीं, बारानगर के दिलीप घोष और उनकी पत्नी दीपाली घोष ने भी अपनी जान गंवा दी।

19 मौतों के बाद भीड़ प्रबंधन पर सवाल

इस घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, प्रवेश और निकास की व्यवस्था तथा आपातकालीन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि अत्यधिक भीड़ का दबाव जानलेवा साबित हुआ। अधिकारी के मुताबिक, 18 शवों का पोस्टमार्टम कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में और एक शव का पोस्टमार्टम नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किया गया। फिलहाल पोस्टमार्टम की ये शुरुआती रिपोर्टें हैं। हादसे की परिस्थितियों और मौतों के कारणों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच तथा चिकित्सा रिपोर्टों से होगी। इस त्रासदी ने एक बार फिर याद दिलाया है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षित भीड़ प्रबंधन लोगों की जान बचाने के लिए कितना जरूरी है।


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