जागरण प्रभात। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने कहा कि अब CJP को अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करनी चाहिए।
केजरीवाल ने सोमवार को 'प्रतिदिन टाइम कॉन्क्लेव' में कहा कि CJP ने पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया था और अब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि संगठन को अब आगे बढ़कर प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग करनी चाहिए।
'सीधे बॉस के इस्तीफे की मांग कीजिए'
केजरीवाल ने कहा, 'पहले आपने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। अब आप मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मैं कहता हूं कि आगे बढ़िए और सीधे बॉस के इस्तीफे की मांग कीजिए।' उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ने जो कुछ किया, वह उनके अनुसार अपने लिए नहीं बल्कि अपने 'बॉस' के लिए किया। इसी संदर्भ में केजरीवाल ने कहा कि अब आंदोलन प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर होना चाहिए। केजरीवाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना अभियान तेज किया है।
CJP ने CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई
दूसरी ओर, CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोमवार को कहा कि संगठन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटेगा। रांका ने मतदाता सूची से कथित तौर पर 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर CEC से सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि संगठन प्रेस और जनता के सामने इस पूरे मामले पर जवाब चाहता है। CJP ने इससे पहले ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था और मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। संगठन ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करने की बात भी कही है।
13 करोड़ नाम हटाए जाने का क्या है मामला?
CJP की ओर से दावा किया गया है कि SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। यह दावा संगठन ने अपने आंदोलन के प्रमुख आधार के तौर पर रखा है। वहीं, चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने रिपोर्टों के बाद कहा है कि SIR सहित आयोग के सभी फैसलों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी थी। आयोग ने यह भी कहा कि किसी संस्थान के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
चुनाव आयोग को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
हाल में एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में मतदाता नाम जोड़ने और हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा चुनावी डेटा से जुड़े तकनीकी प्रबंधन जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया। चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों की रिपोर्टिंग के संदर्भ में कहा कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना सामान्य है और आयोग के अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों को अलग करके देखने से निर्णय प्रक्रिया की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
अब केजरीवाल बनाम CJP बयान से बढ़ा सियासी तापमान
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर CJP के अभियान के बीच केजरीवाल का ताजा बयान इस विवाद को एक अलग राजनीतिक दिशा देता है। केजरीवाल ने CJP से CEC के बजाय प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन करने की बात कही है। हालांकि, CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया है कि संगठन मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में CJP के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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