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Gaya ED Raid: गया से गुरुग्राम-दिल्ली तक रामनंदी कंपनी के 19 ठिकानों पर ED के छापे, बैंक लोन धोखाधड़ी और कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

 

गया में छापेमारी कर घर से बाहर निकलते ईडी के अधिकारी।

जागरण प्रभात। बिहार के गया और बोधगया में शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से बैंक लोन धोखाधड़ी और कथित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। ईडी ने गया की रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड (Ramnandi Hotels and Resorts Ltd.) और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई का दायरा बिहार के अलावा गुरुग्राम और नई दिल्ली तक बताया गया है।

यह मामला करीब 131.79 करोड़ रुपये की कथित अपराध से हुई आय से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी पर बैंकों के कंसोर्टियम से मिले करीब 85 करोड़ रुपये के ऋण में से लगभग 58 करोड़ रुपये के कथित डायवर्जन का आरोप है। इस मामले की शुरुआती जांच सीबीआई कर रही थी। सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट को आधार बनाकर अब ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच आगे बढ़ाई है।

गया से गुरुग्राम और दिल्ली तक पहुंची ED की जांच

ईडी की कार्रवाई का केंद्र गया और बोधगया रहा। एजेंसी ने रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स, कंपनी के निदेशक अखौरी गोपाल तथा उनके बेटों निशांत और नितेश से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली। ताजा रिपोर्टों में तलाशी वाले परिसरों की संख्या को लेकर अंतर है। कुछ रिपोर्टों में 17 ठिकानों पर कार्रवाई की बात कही गई है, जबकि पीटीआई आधारित रिपोर्टों में बिहार, गुरुग्राम और दिल्ली में 9 परिसरों की तलाशी का उल्लेख है। इसलिए कार्रवाई का वास्तविक विस्तृत दायरा ईडी की आधिकारिक जानकारी आने के बाद और स्पष्ट हो सकेगा। गया जी के चांदचौरा और बोधगया के अमर बिगहा समेत विभिन्न स्थानों पर ईडी की टीम ने दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े कागजात खंगाले। तलाशी के दौरान जांच टीम ने कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए, हालांकि बरामदगी के संबंध में एजेंसी की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

85 करोड़ के बैंक लोन में 58 करोड़ डायवर्जन का आरोप

ईडी की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा करीब 85 करोड़ रुपये के बैंक ऋण से जुड़ा है। एजेंसी के अनुसार, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्टियम से कंपनी को ऋण मिला था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस ऋण में से करीब 58 करोड़ रुपये का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल या डायवर्जन किया गया। जांच में फर्जी या जाली परियोजना पूर्णता रिपोर्ट के इस्तेमाल का भी आरोप सामने आया है। ईडी के मुताबिक, इन रिपोर्टों के आधार पर ऋण की राशि हासिल की गई। बैंक ऋण के लिए अखौरी गोपाल और परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत गारंटी भी दी गई थी।

गिरवी रखी संपत्तियों की बिक्री ने बढ़ाया शक

जांच में संपत्तियों से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। ईडी के अनुसार, संबंधित ऋण के बदले कुछ संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं। एजेंसी ने ऐसी पांच संपत्तियों की बिक्री को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि गिरवी रखी गई संपत्तियों को बाद में बेच दिया गया और बिक्री में उनकी कीमत कथित तौर पर काफी कम दिखाई गई। जांच एजेंसी को इन लेनदेन में वित्तीय अनियमितता की आशंका है। ईडी यह भी जांच कर रही है कि इन संपत्तियों की बिक्री के पीछे क्या उद्देश्य था और बिक्री से प्राप्त रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां किया गया।

खरीदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में

मामले में संपत्तियों के कुछ खरीदार भी जांच एजेंसी के रडार पर बताए जा रहे हैं। ईडी को कथित तौर पर संदेह है कि कुछ खरीदारों की आर्थिक क्षमता उन संपत्तियों की कीमत के अनुरूप नहीं थी जिन्हें उन्होंने खरीदा। एजेंसी इस पहलू की जांच कर रही है कि कहीं कुछ खरीदार किसी दूसरे व्यक्ति के लिए बेनामी या प्रॉक्सी खरीदार के रूप में तो इस्तेमाल नहीं किए गए। हालांकि यह अभी जांच का हिस्सा है और किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।

सीबीआई जांच के बाद ED की एंट्री

रामनंदी होटल्स से जुड़ा मामला पहले से ही सीबीआई की जांच में था। सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट में कथित अपराध से हुई आय का आंकड़ा 131.79 करोड़ रुपये बताया गया है। इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका की जांच के लिए ईडी ने PMLA के तहत कार्रवाई शुरू की। इसका मतलब यह है कि एजेंसी अब केवल बैंक लोन में कथित अनियमितता ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी रकम के इस्तेमाल, संपत्तियों के लेनदेन और संभावित धन शोधन की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।

गया से जुड़ा रहा है रामनंदी समूह का कारोबार

रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड का संबंध बिहार के गया से बताया जाता है। कंपनी के निदेशक अखौरी गोपाल का गया जी के चांदचौरा इलाके से जुड़ाव रहा है। उनका पूर्व में रामनंदी ऑटोमोबाइल के नाम से कारोबार भी बताया जाता है। ईडी की कार्रवाई ने गया और बोधगया में कारोबारी गतिविधियों से जुड़े पुराने वित्तीय लेनदेन पर भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

अब आगे क्या होगा?

ईडी की तलाशी के बाद जांच में जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल या वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। एजेंसी बैंक खातों, संपत्ति खरीद-बिक्री, ऋण की रकम के इस्तेमाल और संबंधित लोगों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ सकती है। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो ईडी आगे संपत्तियों की पहचान, अटैचमेंट और अन्य कानूनी कार्रवाई की दिशा में बढ़ सकती है। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी की विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।



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