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Putin India Visit: भारत पहुंचे पुतिन, PM मोदी से आज अहम मुलाकात, BRICS से पहले कई मुद्दों पर होगी चर्चा

जागरण प्रभात। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को तीन दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। पुतिन BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। दोनों नेताओं की बातचीत में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है। रूसी राष्ट्रपति के भारत पहुंचने के साथ ही इस यात्रा पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं। खास बात यह है कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब पुतिन रूस के बाहर आयोजित किसी BRICS शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा ले रहे हैं। इससे भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ BRICS की बदलती भूमिका को लेकर भी इस यात्रा का महत्व बढ़ गया है।

पुतिन-मोदी की बैठक में क्या होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच शुक्रवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा किए जाने की संभावना है। व्यापार और निवेश बढ़ाने के अलावा ऊर्जा सहयोग, रक्षा, तकनीक, औषधि, अंतरिक्ष और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क जैसे विषय भी बातचीत के एजेंडे में रह सकते हैं। भारत और रूस के बीच हाल के वर्षों में ऊर्जा सहयोग बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है। बदलते वैश्विक हालात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहे दबाव के बीच दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत करने के रास्तों पर चर्चा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन इससे पहले 31 अगस्त को बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात कर चुके हैं। उस बातचीत में दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी। भारत सरकार के अनुसार दोनों नेताओं ने विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को आगे मजबूत करने पर सहमति जताई थी।

रक्षा सहयोग पर भी रहेगी नजर

मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा सहयोग भी महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार S-400 प्रणाली की शेष डिलीवरी और अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़े सहयोग पर बातचीत संभावित है। हालांकि इन मुद्दों पर किसी अंतिम समझौते की पुष्टि बैठक के बाद ही होगी। इसलिए इन्हें संभावित एजेंडे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। रूस के साथ भारत का रक्षा सहयोग दशकों पुराना है और दोनों देश अब पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़कर संयुक्त विकास और उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

परमाणु ऊर्जा और नई तकनीक पर भी बातचीत

ऊर्जा के क्षेत्र में भी पुतिन की भारत यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा सहित विभिन्न विकल्पों पर काम कर रहा है। ऐसे में असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के बीच बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। इसके साथ ही तकनीक, अंतरिक्ष, फार्मास्यूटिकल्स और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने पर भी दोनों पक्ष चर्चा कर सकते हैं। भारत और रूस के बीच 24 अगस्त को मॉस्को में हुई 27वीं India-Russia Inter-Governmental Commission on Trade, Economic and Cultural Matters की बैठक के परिणामों को भी आगे बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।

यूक्रेन युद्ध पर भी होगी बातचीत

मोदी-पुतिन बातचीत का सबसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दा रूस-यूक्रेन संघर्ष हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी इस बात पर जोर देते रहे हैं कि संघर्षों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। बिश्केक में पिछली मुलाकात के दौरान भी यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक परिस्थितियों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई थी। ऐसे में दिल्ली में होने वाली बातचीत में युद्ध समाप्त करने और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श की उम्मीद है।

BRICS में भारत के सामने बड़ी चुनौती

नई दिल्ली में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन भी बेहद महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापार तनाव और अमेरिकी शुल्क नीतियों का असर विश्व अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। भारत चाहता है कि BRICS केवल राजनीतिक बयान देने वाला मंच न रहे, बल्कि खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का प्रभावी मंच बने। विस्तारित BRICS में अब पहले की तुलना में अधिक देश शामिल हैं। इससे समूह का वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है, लेकिन अलग-अलग देशों के हितों के कारण आम सहमति बनाना भी चुनौतीपूर्ण हुआ है।

चीन और ईरान समेत कई देशों के नेता दिल्ली में

BRICS सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी सहित कई शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में दिल्ली अगले दो दिनों तक वैश्विक कूटनीति का प्रमुख केंद्र रहने वाली है। विशेष रूप से भारत-रूस और भारत-चीन संबंधों से जुड़ी द्विपक्षीय बैठकों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

क्यों अहम है पुतिन का भारत दौरा?

पुतिन का भारत दौरा केवल BRICS सम्मेलन तक सीमित नहीं है। यह ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। भारत एक ओर रूस के साथ अपने लंबे रणनीतिक संबंधों को बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी अपने संबंधों को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे वातावरण में नई दिल्ली की कूटनीति का मुख्य संदेश यही है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर अलग-अलग साझेदारों के साथ संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाएगा। पुतिन और मोदी की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ वैश्विक संकटों पर दोनों देशों के दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलेगा।

BRICS से आगे भारत-रूस संबंधों पर नजर

पुतिन की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान होने वाली बातचीत से आने वाले महीनों में भारत-रूस आर्थिक और रणनीतिक सहयोग की दिशा को लेकर संकेत मिलने की उम्मीद है। व्यापार को बढ़ाना, ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना, रक्षा साझेदारी को नई दिशा देना, तकनीकी सहयोग बढ़ाना और वैश्विक संकटों पर संवाद बनाए रखना दोनों देशों के लिए प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। BRICS शिखर सम्मेलन की व्यापक कूटनीति के बीच मोदी-पुतिन बैठक भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की अगली दिशा तय करने वाली अहम बातचीत के रूप में देखी जा रही है।


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