पुलिस के अनुसार, ये मामले सार्वजनिक संपत्ति को कथित नुकसान पहुंचाने, पुलिसकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की और मारपीट, सरकारी कामकाज में बाधा डालने तथा निषेधाज्ञा के उल्लंघन जैसे आरोपों से संबंधित हैं। हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है। प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है।
2 अक्टूबर से लगातार जारी हैं विरोध प्रदर्शन
दिल्ली में 2 अक्टूबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के पीछे मुख्य रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे राजनीतिक सवाल बताए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों में विभिन्न राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और अन्य समूहों के लोग शामिल हुए। बाद के दिनों में विपक्षी सांसदों ने भी निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की कोशिश की। इंडियन एक्सप्रेस की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग प्रदर्शनों और मार्च के दौरान हुई घटनाओं के संबंध में पुलिस ने कुल 25 प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी दी।
धक्का-मुक्की और अन्य आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों से संबंधित दर्ज मामलों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा के नाम भी शामिल हैं। इन मामलों में पुलिसकर्मियों के कथित तौर पर काम में बाधा डालने, धक्का-मुक्की और अन्य आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। इससे पहले भी दिल्ली में निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर दोनों कांग्रेस नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की खबरें सामने आई थीं। इन आरोपों के संबंध में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी व्यक्ति का नाम प्राथमिकी में दर्ज होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उस व्यक्ति ने आरोपित अपराध किया ही है।
किन आरोपों में दर्ज की गईं प्राथमिकी?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग घटनाओं से संबंधित मामलों में मुख्य रूप से निम्न आरोप शामिल हैं:
- सार्वजनिक संपत्ति को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाना।
- पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट या धक्का-मुक्की।
- सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने का आरोप।
- नई दिल्ली जिले में लागू निषेधाज्ञा का कथित उल्लंघन।
- विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई अन्य घटनाओं से संबंधित आरोप।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सभी 25 प्राथमिकी में एक जैसे आरोप होना आवश्यक नहीं है। अलग-अलग घटनाओं की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित मामलों की जांच की जाती है।
BNSS की धारा 163 क्या है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत सक्षम कार्यपालक मजिस्ट्रेट कुछ परिस्थितियों में सार्वजनिक शांति, सुरक्षा या अन्य वैधानिक उद्देश्यों के लिए तत्काल निवारक आदेश जारी कर सकते हैं। ऐसे आदेशों के तहत किसी क्षेत्र में लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने या कुछ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। प्रतिबंधों का दायरा संबंधित आदेश की शर्तों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, नई दिल्ली जिले में लागू निषेधाज्ञा के उल्लंघन को लेकर भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। किसी विशेष मामले में आदेश का उल्लंघन हुआ या नहीं, यह संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगा।
पुलिस ने क्यों तेज की कार्रवाई?
पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शनों के दौरान कथित अव्यवस्था और बार-बार सामने आई घटनाओं के बाद कार्रवाई की गई। पुलिस का पक्ष है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने देना उसकी जिम्मेदारी है। दूसरी ओर, इन प्रदर्शनों का राजनीतिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। विपक्षी दल निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस प्रकार, दिल्ली में दर्ज हुईं 25 प्राथमिकी केवल पुलिस कार्रवाई से जुड़ी खबर नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शनों का व्यापक संदर्भ भी है।
आगे क्या होगा?
अब संबंधित प्राथमिकी में दर्ज आरोपों, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस प्रत्येक मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे क्या कदम उठाती है और संबंधित पक्ष अपना पक्ष किस तरह रखते हैं। फिलहाल, 9 अक्टूबर 2026 तक सामने आई जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर से अब तक विरोध प्रदर्शनों से संबंधित 25 प्राथमिकी दर्ज किए जाने की बात कही है। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा के नाम भी शामिल बताए गए हैं। इन मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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