गोवा के घर में बिगड़ी तबीयत, अस्पताल पहुंचने से पहले शुरू हुआ इलाज
नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला स्थित अपने अपार्टमेंट में रह रहे थे। अस्पताल से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, अभिनेता ने तड़के अपने एक मित्र को संदेश भेजकर तबीयत खराब होने की जानकारी दी थी।मित्र ने संदेश देखने के बाद उनके आवास का रुख किया। वहां नाना पाटेकर को अस्वस्थ हालत में पाया गया। उनके साथ मौजूद केयरटेकर की मदद से अस्पताल को सूचना दी गई और एंबुलेंस उनके घर भेजी गई।
चिकित्सकीय टीम ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में उपचार और CPR शुरू कर दिया था। अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश जारी रखी, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ।
पोस्टमार्टम से सामने आएगा मौत का सटीक कारण
अस्पताल के चिकित्सक के मुताबिक, नाना पाटेकर की मौत कार्डियक अरेस्ट/हृदय संबंधी आपात स्थिति के बाद हुई। हालांकि मौत के सटीक कारण की पुष्टि के लिए उनका शव गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बम्बोलिम भेजा गया है, जहां पोस्टमार्टम किया जाना है। इस मामले में मेडिको-लीगल केस भी दर्ज किया गया है। इसलिए फिलहाल उनकी मौत को लेकर सामने आई चिकित्सकीय जानकारी को अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अलग समझना जरूरी है।
चार दिन पहले ही सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए थे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर के निधन को इसलिए भी अचानक माना जा रहा है क्योंकि वह निधन से कुछ दिन पहले ही गोवा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखाई दिए थे। रिपोर्टों के अनुसार, यह उनकी आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी थी। उनकी आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसी कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने जीवन और मृत्यु को लेकर भी विचार साझा किए थे। उनके निधन के बाद उनका यह आखिरी सार्वजनिक संदेश विशेष रूप से चर्चा में आ गया है।
अभिनय को बनाया अपनी अलग पहचान
नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपने अभिनय की अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज, संवाद अदायगी और किरदारों में उतर जाने की क्षमता ने उन्हें दूसरी पीढ़ी के कलाकारों से अलग पहचान दिलाई। 'परिंदा', 'प्रहार: द फाइनल अटैक', 'तिरंगा', 'क्रांतिवीर' और 'खामोशी: द म्यूजिकल' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को विशेष रूप से याद किया जाता है। बाद के दौर में 'वेलकम' जैसी फिल्म के जरिए उन्होंने नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी।
तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित
नाना पाटेकर को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के साथ फिल्मफेयर और महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया था। भारत सरकार ने उन्हें 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। अभिनय के अलावा वह थिएटर और फिल्म निर्माण से भी जुड़े रहे।
नाना पाटेकर के निधन से सिनेमा जगत में शोक
नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है। करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने गंभीर, सामाजिक और व्यावसायिक—हर तरह के किरदारों में अपनी छाप छोड़ी। उनकी सबसे बड़ी पहचान सिर्फ उनकी फिल्मों की संख्या नहीं, बल्कि किरदार को अपनी आवाज, तेवर और अभिनय से यादगार बना देने की क्षमता रही। यही वजह है कि भारतीय सिनेमा में नाना पाटेकर का नाम लंबे समय तक एक अलग तरह के अभिनय के लिए याद किया जाएगा।
जागरण प्रभात की ओर से दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि।

0 Comments