अमेरिका ने भारत को एक माह तक रूस से तेल खरीदने की दी छूट
JagranPrabhat : अमेरिका के वित्त विभाग ने भारत को रूस से कच्चे तेल खरीदने के लिए एक माह की अस्थायी छूट दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्काट बेसेंट के मुताबिक यह कदम जानबूझकर उठाया गया है ताकि रूस को इससे कोई बड़ा आर्थिक लाभ न मिल सके, क्योंकि यह केवल उन तेल खेपों के लेनदेन की अनुमति देता है जो पहले से समुद्र में फंसी हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और वाशिंगटन को उम्मीद है कि नई दिल्ली आगे चलकर अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा। उनके अनुसार यह अस्थायी व्यवस्था ईरान की ओर से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ने से उत्पन्न स्थिति को कम करने के लिए की गई है। इस घोषणा के बाद अमेरिकी वित्त विभाग के आफिस आफ फारेन असेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने एक विशेष लाइसेंस जारी किया है जिसके तहत पांच मार्च, 2026 तक जहाजों पर लदे रूसी मूल के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को भारत तक पहुंचाने और बेचने की अनुमति दी गई है। यह छूट चार अप्रैल, 2026 तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान उन जहाजों से जुड़े लेनदेन की भी अनुमति होगी जो विभिन्न प्रतिबंध व्यवस्थाओं के कारण फंसे हुए हैं। इसमें यह साफ तौर पर लिखा गया है कि उक्त रूसी कच्चे तेल को भारतीय कंपनियां ही खरीदेंगी और उन्हें भारत के पोर्ट पर ही उतारा जाएगा। यह भी साफ किया गया है कि उक्त आदेश की आड़ में ईरान से किसी तरह की कोई खरीद-फरोख्त नहीं होनी चाहिए। प्रेट्र के अनुसार, क्रिस राइट ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटों की वजह से तेल की कीमत थोड़ी बढ़ गई हैं, इसलिए हम यह अल्पकालिक कार्रवाई कर रहे हैं क्योंकि चीन अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ अच्छा बर्ताव नहीं करता। उन्होंने कहा कि यह रूस के प्रति नीति में कोई बदलाव नहीं है। यह नीति में बहुत छोटा बदलाव है ताकि तेल की कीमतों को थोड़ा और कम रखा जा सके।
गौरतल है कि भारत ने मार्च, 2022 के बाद से रूस से कच्चे तेल की बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू की है। उसके पहले भारत की कुल जरूरत में रूस से आयातित तेल का सिर्फ 0.2 प्रतिशत हिस्सा होता था जो बाद के तीन वर्षों में बढ़कर 35-45 प्रतिशत तक पहुंच गया था। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंध को दरकिनार कर भारत ने रूस से तेल की खरीद की। एक समय भारत का रूसी तेल आयात कई महीनों तक प्रतिदिन 15 से 18 लाख बैरल तक पहुंच गया था और रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था। हालांकि हाल के महीनों में अमेरिकी प्रतिबंधों तथा भुगतान व शिपिंग से जुड़ी जटिलताओं के कारण इसमें कुछ कमी आई है। इसके बावजूद फरवरी, 2026 में भी भारत रूस से प्रतिदिन लगभग 10 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल खरीदता रहा और मार्च में भी यह स्तर काफी हद तक बना हुआ है।
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