
फतेहपुर प्रखंड केरंगूनगर गांव का पीयूष।
Jagran Prabhat : बिहार के गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत कठौतिया केवला पंचायत के रंगूनगर गांव में गुरुवार की शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। खेलते-खेलते चार वर्षीय पीयूष कुमार, पिता दिनेश मांझी, एक खुले बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर जुट गए। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
करीब 30 से 35 फीट की गहराई में फंसा बच्चा
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| कैमरे में 35 फीट बोरवेल में दिख रहा पीयूष। |
प्रशासन के अनुसार पीयूष लगभग 30 से 35 फीट की गहराई पर फंसा हुआ है। राहत की बात यह है कि कैमरे की मदद से बच्चे का सिर दिखाई दे रहा है। लगातार पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है ताकि रेस्क्यू पूरा होने तक उसकी सांस सामान्य बनी रहे।
जेसीबी से समानांतर गड्ढा खोदकर बचाने की कोशिश
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| पीयूष को निकालने के लिए बोलवेल के पास जेपाीसी से किया जा रहा गड्ढा। |
बचाव दल ने बोरवेल के समानांतर एक बड़ा गड्ढा खोदना शुरू किया है। जेसीबी मशीनों की मदद से सावधानीपूर्वक खुदाई की जा रही है ताकि बच्चे तक सुरक्षित पहुंचा जा सके। रात होने के बावजूद रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
पटना से NDRF की विशेष टीम रवाना
गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने घटना की गंभीरता को देखते हुए पटना से NDRF की विशेष टीम को बुलाया है। वहीं SDRF पहले से मौके पर मौजूद है और विशेषज्ञों की निगरानी में वैज्ञानिक तरीके से बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि बच्चे की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर संभव संसाधन उपलब्ध कराया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप-खुला छोड़ दिया गया था बोरवेल
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह बोरवेल करीब एक महीने पहले नल-जल योजना के तहत खोदा गया था। पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण इसे उपयोग में नहीं लाया गया और केवल बोरे से ढककर छोड़ दिया गया। लोगों का कहना है कि यदि बोरवेल को पूरी तरह बंद किया गया होता तो यह हादसा नहीं होता। इस घटना के बाद संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। घटनास्थल पर अनावश्यक भीड़ न लगाएं और बचाव कार्य में सहयोग करें। अधिकारियों के अनुसार जैसे-जैसे रेस्क्यू आगे बढ़ेगा, आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी।
बोरवेल हादसे फिर बने चिंता का कारण
देशभर में समय-समय पर खुले बोरवेल में बच्चों के गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुपयोगी बोरवेल को तत्काल मानक प्रक्रिया के अनुसार पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।


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