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| फतेहपुर प्रखंड के रंगून गांव में 35 फीट बोरवेल से निकला पीयूष। |
Jagran Prabhat : बिहार के गया जिले से गुरुवार की रात राहत देने वाली खबर सामने आई। फतेहपुर प्रखंड के रंगून नगर गांव में 35 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिरे चार वर्षीय पीयूष कुमार को करीब सात घंटे तक चले हाई-टेक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रात 1:50 बजे पटना से पहुंची NDRF की टीम ने बच्चे को सकुशल बाहर निकालते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के लोगों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, जबकि मौके पर मौजूद हजारों ग्रामीणों ने तालियों और जयकारों के साथ राहत का इजहार किया।
खेलते-खेलते खुले बोरवेल में गिरा मासूम
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार शाम करीब 6:28 बजे चार वर्षीय पीयूष घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह नल-जल योजना के लिए खोदे गए खुले बोरवेल के पास पहुंच गया और अचानक उसमें गिर गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। परिवार के लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत प्रशासन को सूचना दी।
प्रशासन ने तुरंत संभाली कमान
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। कुछ ही देर में NDRF, SDRF, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। पूरे अभियान के दौरान वजीरगंज कैंप डीएसपी सुनील कुमार पांडेय, अंचलाधिकारी अमित सिंह, बीडीओ शशि भूषण साहू सहित कई अधिकारी लगातार मौके पर डटे रहे। बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने और उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया गया।
सात घंटे तक चली जिंदगी की जंग
रेस्क्यू ऑपरेशन आसान नहीं था। संकरी जगह, मिट्टी धंसने का खतरा और रात का समय टीम के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। इसके बावजूद NDRF के जवानों ने धैर्य और तकनीकी कौशल का परिचय देते हुए लगातार प्रयास जारी रखा। आखिरकार रात 1:50 बजे मासूम पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जैसे ही बच्चा बाहर आया, वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और पूरा माहौल खुशी से गूंज उठा।
अस्पताल में कराया गया स्वास्थ्य परीक्षण
रेस्क्यू के तुरंत बाद बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) फतेहपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी प्राथमिक जांच की। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चे के एक पैर में हल्की सूजन पाई गई। बेहतर इलाज और विस्तृत जांच के लिए उसे गया के बड़े अस्पताल रेफर कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि बच्चे की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई।
ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर उठे सवाल
रेस्क्यू अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर भी सवाल खड़े हुए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर भेजे गए पांच ऑक्सीजन सिलेंडरों में चार खाली थे, जिससे कुछ देर के लिए नाराजगी का माहौल बन गया। हालांकि प्रशासन ने तत्काल स्थिति संभाल ली और रेस्क्यू अभियान बिना किसी बाधा के जारी रखा।
लापरवाही की होगी जांच
आपदा प्रबंधन विभाग के एडीएम ने स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पूरे जिले में रेस्क्यू ऑपरेशन की हो रही चर्चा
पीयूष के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद फतेहपुर ही नहीं बल्कि पूरे गया जिले में राहत और खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने NDRF, SDRF, जिला प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीम की तत्परता, धैर्य और पेशेवर कार्यशैली की जमकर सराहना की। यह ऑपरेशन एक बार फिर यह संदेश देता है कि आपदा की घड़ी में प्रशासनिक समन्वय, आधुनिक तकनीक और समय पर कार्रवाई किसी भी बड़ी दुर्घटना को टाल सकती है।

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