Jagran Prabhat: बिहार सरकार ने राज्य के लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों और कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी घोषणा की है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया है कि अब शिक्षक भर्ती की अधियाचना (Requisition) हर वर्ष जुलाई महीने में नियमित रूप से भेजी जाएगी। इससे भर्ती प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
मंत्री ने कहा कि इस वर्ष भी विभाग ने 31 जुलाई से पहले अधियाचना भेज दी है। जिन विषयों और भाषाओं की रिक्तियां इस बार किसी कारणवश शामिल नहीं हो सकीं, उन्हें अगली अधियाचना में जोड़ा जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के किसी भी विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की कमी न रहे।
हर साल तय समय पर होगी शिक्षक भर्ती
अब तक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया कई बार अनिश्चित समय पर शुरू होती रही, जिससे अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत जुलाई महीने को स्थायी समय सीमा बनाने की तैयारी की गई है। इसका सीधा फायदा उन अभ्यर्थियों को मिलेगा जो बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं। नियमित अधियाचना भेजे जाने से भर्ती कैलेंडर भी समय पर जारी होने की संभावना बढ़ेगी।
रेशनलाइजेशन के बाद होगी विषयवार और भाषावार मैपिंग
शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभाग पहले पूरे राज्य में शिक्षकों का रेशनलाइजेशन पूरा करेगा। इसके बाद प्रत्येक सरकारी विद्यालय में विषयवार और भाषावार शिक्षकों की उपलब्धता और रिक्त पदों का विस्तृत डेटा तैयार किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट होगा कि किस जिले और किस विद्यालय में किस विषय के कितने शिक्षकों की आवश्यकता है। इसके आधार पर भविष्य की सभी नियुक्तियां की जाएंगी ताकि कहीं भी शिक्षकों की कमी या अधिकता जैसी समस्या न रहे।
जिला कैडर व्यवस्था से शिक्षकों को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे शिक्षकों के लिए जिला कैडर व्यवस्था लागू की जाएगी। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद शिक्षकों को स्थानांतरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर ही सुनवाई का अवसर मिलेगा। यदि कोई शिक्षक तबादले से संतुष्ट नहीं होगा तो वह जिला समिति के समक्ष आवेदन दे सकेगा। जरूरत पड़ने पर मामला मुख्यालय स्तर तक जाएगा और विभागीय सचिव स्वयं भी शिकायतों की समीक्षा करेंगे। इससे शिक्षकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
पूरी तरह पारदर्शी होगी ट्रांसफर प्रक्रिया
शिक्षा मंत्री ने कहा कि तबादले की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वह स्वयं प्रत्येक दो दिन पर पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेंगे। यदि किसी शिक्षक की ओर से कोई समस्या सामने आती है तो विभागीय अधिकारी सीधे संबंधित शिक्षक से संपर्क कर समाधान निकालेंगे।
शिक्षकों की पसंद का ही मिलेगा स्कूल
नई तबादला नीति की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षकों को जिन विद्यालयों का विकल्प भरने का अवसर दिया जाएगा, उनका स्थानांतरण उन्हीं विकल्पों में से किसी एक विद्यालय में किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी शिक्षक का तबादला उसके द्वारा दिए गए विकल्पों के बाहर किसी अन्य विद्यालय में नहीं किया जाएगा। इस घोषणा से हजारों शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता दूर होती दिखाई दे रही है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में भी लगाए जाएंगे शिक्षक
राज्य सरकार ने सरकारी विद्यालय परिसरों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर भी नई योजना बनाई है। मंत्री के अनुसार वर्तमान में लगभग 10 हजार सरकारी विद्यालय परिसरों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में जहां आवश्यकता होगी वहां अधिशेष शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा सरकारी विद्यालयों के निकट स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों में भी प्राथमिक शिक्षकों को भेजा जाएगा ताकि छोटे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और बेहतर हो सके। जिन विषयों की रिक्तियां नहीं आईं, उन्हें मिलेगी अगली भर्ती में जगह कई अभ्यर्थियों की शिकायत थी कि कुछ विषयों और भाषाओं के पद इस बार अधियाचना में शामिल नहीं किए गए हैं। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि ऐसे सभी विषयों की रिक्तियां अगली अधियाचना में जोड़ी जाएंगी। इसलिए संबंधित अभ्यर्थियों को निराश होने की आवश्यकता नहीं है।
शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए क्या है सबसे बड़ी राहत?
नई घोषणाओं के बाद शिक्षक अभ्यर्थियों को कई स्तर पर राहत मिलने की उम्मीद है।
हर साल जुलाई में नियमित अधियाचना।
भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता कम होगी।
विषयवार रिक्तियों का वैज्ञानिक निर्धारण।
पारदर्शी ट्रांसफर व्यवस्था।
जिला कैडर से शिकायतों का स्थानीय समाधान।
पसंदीदा विकल्पों के आधार पर तबादला।
स्कूलों में शिक्षकों की बेहतर उपलब्धता।
शिक्षा व्यवस्था पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार नियमित भर्ती कैलेंडर, रेशनलाइजेशन और जिला कैडर व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करती है तो बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। इससे एक ओर जहां विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर होगी, वहीं दूसरी ओर कार्यरत शिक्षकों की प्रशासनिक समस्याएं भी कम होंगी।

0 Comments