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पटना CBI की कार्रवाई: 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते आयकर विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर गिरफ्तार, NGO से 75 हजार रुपये मांगने का आरोप

जागरण प्रभात। बिहार की राजधानी पटना में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आयकर विभाग की एक महिला अधिकारी को कथित रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक, Income Tax Department की Assistant Commissioner सुनंदा कुमार को 15 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। इस मामले में विभाग की एक क्लर्क को भी CBI ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि एक NGO को आयकर विभाग से जुड़े 12A और 80G प्रमाणपत्र जारी करने के बदले कुल 75 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। CBI की कार्रवाई के बाद पटना में आयकर विभाग से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक और सरकारी महकमों में हलचल बढ़ा दी है। जांच एजेंसी ने कथित रिश्वत की रकम भी बरामद करने की बात सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए CBI अपने साथ ले गई।

NGO के प्रमाणपत्र के बदले मांगी गई थी रकम

मामले की शुरुआत एक NGO से जुड़े काम को लेकर हुई बताई जा रही है। आरोप के अनुसार, NGO को 12A और 80G प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई। बताया गया है कि इस काम के बदले 75 हजार रुपये मांगे गए थे। इसी शिकायत के आधार पर CBI ने कार्रवाई की योजना बनाई। जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए Assistant Commissioner सुनंदा कुमार को गिरफ्तार किया गया। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रिश्वत मांगने और लेने से जुड़े ये तथ्य आरोप और जांच एजेंसी की कार्रवाई पर आधारित हैं। मामले में अदालत की प्रक्रिया के बाद ही आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आएगा।

रिश्वत लेने में क्लर्क की भी भूमिका का आरोप

CBI की कार्रवाई केवल Assistant Commissioner तक सीमित नहीं रही। मामले में आयकर विभाग की एक क्लर्क को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने रिश्वत की रकम लेने में अधिकारी की मदद की थी। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि कथित रिश्वत की मांग और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में दोनों आरोपियों की भूमिका क्या थी। साथ ही यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है कि क्या इस तरह के किसी अन्य मामले में भी ऐसी मांग की गई थी।

15 हजार रुपये की रकम बरामद होने का दावा

CBI की कार्रवाई के दौरान कथित रिश्वत की रकम बरामद किए जाने की बात सामने आई है। एजेंसी ने मौके पर कार्रवाई कर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। रिश्वतखोरी के मामलों में ट्रैप कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी शिकायत, बातचीत, लेन-देन और बरामदगी समेत कई पहलुओं को जांच का हिस्सा बनाती है। इस मामले में भी CBI आगे की जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपियों के बयानों की पड़ताल करेगी।

गिरफ्तारी के बाद चेहरा छिपाती दिखीं अधिकारी

गिरफ्तारी के बाद जब CBI टीम Assistant Commissioner सुनंदा कुमार को पूछताछ के लिए अपने साथ ले जा रही थी, तब वह चेहरा छिपाती हुई नजर आईं। घटना से जुड़ी तस्वीर और वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। हालांकि, किसी आरोपी का चेहरा छिपाना या मीडिया के सामने उसकी स्थिति अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। अंतिम फैसला न्यायालय की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

आज कोर्ट में पेश किए जाएंगे दोनों आरोपी

गिरफ्तारी के बाद CBI दोनों आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। कोर्ट में पेशी के दौरान CBI आरोपियों की हिरासत और आगे की जांच के संबंध में अपनी दलील रख सकती है। इसके बाद अदालत के आदेश से तय होगा कि आरोपियों को CBI की हिरासत में रखा जाएगा या न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।

12A और 80G प्रमाणपत्र क्या होते हैं?

इस मामले में 12A और 80G प्रमाणपत्र का जिक्र महत्वपूर्ण है। आयकर कानून के तहत पात्र संस्थाओं और ट्रस्टों को मिलने वाली कर-संबंधी छूट और दानदाताओं से जुड़े टैक्स लाभ के संदर्भ में इन प्रावधानों की अहम भूमिका होती है। इसी वजह से किसी NGO या charitable संस्था के लिए संबंधित आयकर अनुपालन और प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की जांच और पात्रता के आधार पर प्रक्रिया पूरी की जाती है। CBI का आरोप है कि इसी प्रक्रिया से जुड़े काम को आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की गई। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि संबंधित आवेदन और प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ था।

CBI की कार्रवाई से फिर उठा भ्रष्टाचार पर सवाल

पटना में सामने आए इस मामले ने सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। खासकर तब, जब किसी संस्था से जुड़े वैधानिक या प्रशासनिक काम को पूरा कराने के बदले कथित तौर पर पैसे की मांग किए जाने का आरोप हो। CBI पहले भी रिश्वतखोरी के मामलों में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करती रही है। बिहार में हाल के दिनों में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता भी चर्चा में रही है। सितंबर 2026 में बिहार सरकार ने CBI की जांच संबंधी सहमति के दायरे में भी बदलाव किया है, जिसके तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों और कुछ अन्य श्रेणियों से जुड़े मामलों में CBI के अधिकार क्षेत्र को लेकर नया प्रावधान सामने आया है।

अब आगे क्या होगा?

अब इस मामले में CBI की जांच आगे बढ़ेगी। जांच एजेंसी कथित रिश्वत की मांग, रकम के लेन-देन, NGO के आवेदन और 12A-80G प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकती है। साथ ही गिरफ्तार अधिकारी और क्लर्क से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कथित रिश्वत मांगने के पीछे पूरी प्रक्रिया क्या थी। शुक्रवार को अदालत में पेशी के बाद मामले की अगली कानूनी दिशा भी स्पष्ट होगी। जांच पूरी होने के बाद CBI अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।



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