Jagran Prabhat : बिहार में गया जिले के शेरघाटी थाना क्षेत्र के झौर गांव से मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां चोरी के संदेह में एक 16 वर्षीय किशोर की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। शुक्रवार सुबह पुलिस ने गांव के एक घर से किशोर का शव बरामद किया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
वर्षीय पंकज मांझी झौर गांव का रहने वाला था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पंकज गुरुवार देर रात गांव के ही बालेश्वर यादव के घर में घुस गया था। घरवालों को उसके घर में होने की भनक लगी तो उन्होंने उसे पकड़ लिया। आरोप है कि इसके बाद घर के लोगों के साथ कुछ अन्य ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए और किशोर को बांधकर उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
सुबह पुलिस ने घर से बरामद किया शव
शुक्रवार की सुबह घटना की सूचना मिलने पर शेरघाटी के डीएसपी संदीप कुमार और थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने बालेश्वर यादव के घर से किशोर का शव बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए मगध मेडिकल भेज दिया। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ पुलिस ने साक्ष्य भी जुटाए हैं। मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
चोरी के संदेह ने ले ली किशोर की जान
ग्रामीणों के अनुसार, किशोर पर चोरी का संदेह जताया गया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उसके खिलाफ चोरी का कोई ठोस प्रमाण था या नहीं। पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। यदि किसी पर चोरी का संदेह था, तो उसे पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए था। कानून को दरकिनार कर की गई हिंसा एक गंभीर अपराध है।
परिजनों में मातम, गांव में तनाव
पंकज मांझी की मौत के बाद उसके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी घटना को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर इलाके में निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
पुलिस ने शुरू की कानूनी कार्रवाई
शेरघाटी थाने की पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना में शामिल सभी आरोपितों की भूमिका की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
कानून से ऊपर नहीं है भीड़ का फैसला
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि चोरी के महज संदेह में किसी व्यक्ति की जान लेना किस तरह समाज में कानून व्यवस्था और मानवीय मूल्यों को चुनौती देता है। किसी भी आरोप का फैसला अदालत और कानून के दायरे में होना चाहिए, न कि भीड़ के हिंसक रवैये से। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पूरी तरह सामने आ सकेगी.

0 Comments