सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना राष्ट्रद्रोह नहीं, लोकतंत्र का अधिकार है: पुणे कोर्ट ने NCP (SP) नेता को दी जमानत
Jagran Prabhat :
लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ना नहीं माना जा सकता। इसी महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ पुणे की एक अदालत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सोशल मीडिया इकाई के प्रदेश अध्यक्ष महादेव बालगुडे को जमानत दे दी।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कानूनी कार्रवाई पर देशभर में बहस जारी है।
क्या है पूरा मामला?
को अप्रैल 2026 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कथित रूप से एडिट की गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने और नक्सलियों के प्रति सहानुभूति जताने वाली सामग्री पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया था। धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है।
अदालत ने क्या कहा?
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी. डी. कुलकर्णी ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने:
राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा की।
किसी को युद्ध के लिए उकसाया।
भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कार्य किया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों, योजनाओं और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाना सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को ऐसा करने का अधिकार है।
धारा 152 लगाने पर भी अदालत की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में BNS की धारा 152 लागू होना स्वयं विवाद का विषय है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी पर लगी अन्य धाराएं जमानती प्रकृति की हैं।
जांच पूरी, इसलिए मिली जमानत
अदालत ने कहा कि पुलिस जांच पूरी कर चुकी है और आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। ऐसे में आरोपी से आगे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।महादेव बालगुडे को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई है। साथ ही उन्हें निम्न शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया गया है:
किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे।
जांच अधिकारी को अपना पता और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराएंगे।
अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।
बचाव पक्ष की दलील
सुनवाई के दौरान बालगुडे के वकील समीर शेख ने अदालत में कहा कि यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार की आलोचना करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश इस बात को रेखांकित करता है कि सरकार की आलोचना और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर है। अदालत ने संकेत दिया कि केवल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने या आलोचना करने मात्र से किसी व्यक्ति पर देश की संप्रभुता के खिलाफ कार्रवाई का आरोप स्वतः सिद्ध नहीं हो जाता।

0 Comments