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Bihar Fiscal Crisis: तेजस्वी का बड़ा दावा—5.8% राजकोषीय घाटे से बढ़ी चिंता, कर्ज और बजट प्रबंधन पर सरकार को घेरा

जागरण प्रभात। बिहार की वित्तीय स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर निशाना साधा है।

तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर दावा किया कि बिहार का सार्वजनिक कर्ज तेजी से बढ़ रहा है और वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 5.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक बताते हुए बिहार को गंभीर वित्तीय संकट से गुजरने वाला राज्य करार दिया।

5.8% राजकोषीय घाटे का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण?

तेजस्वी यादव का 5.8 प्रतिशत का आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब बिहार की वित्तीय स्थिति को लेकर अलग-अलग आकलनों में भी दबाव की तस्वीर दिखाई गई है। अगस्त 2026 में प्रकाशित क्रिसिल के विश्लेषण के मुताबिक, 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा 5.8 प्रतिशत GSDP रहा, जो उसके अध्ययन में शामिल प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक था।

हालांकि, बिहार के 2026-27 बजट के विश्लेषण में 2025-26 के संशोधित अनुमान के आधार पर राजकोषीय घाटा 11.8 प्रतिशत GSDP बताया गया है। यानी 5.8 प्रतिशत और 11.8 प्रतिशत अलग-अलग आधार/अनुमान को दर्शाते हैं। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही पैमाने पर रखकर देखना उचित नहीं होगा।

सरकारी कर्मचारियों से लेकर ठेकेदारों के भुगतान तक पर सवाल

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों के वेतन-पेंशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, ठेकेदारों के भुगतान तथा विकास योजनाओं के लिए समय पर धन उपलब्ध कराने में सरकार को परेशानी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि वित्तीय दबाव का असर शिक्षा और सामाजिक योजनाओं पर भी पड़ रहा है। तेजस्वी के अनुसार, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के बजटीय आवंटन में कमी की गई है और छात्रवृत्तियों में भी कटौती की जा रही है हालांकि, इन आरोपों को सरकार की ओर से दी गई आधिकारिक प्रतिक्रिया के साथ देखना जरूरी होगा। खबर लिखे जाने तक इन सभी आरोपों पर सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

बढ़ते कर्ज पर भी तेजस्वी का निशाना

राजद नेता ने कहा कि बिहार में कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और इसके साथ राजस्व घाटे का दबाव भी चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास राजस्व संग्रह बढ़ाने, बजट प्रबंधन को मजबूत करने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति नहीं है। बिहार सरकार के आधिकारिक बजट दस्तावेजों में भी पिछले वर्षों में सार्वजनिक कर्ज में वृद्धि दर्ज की गई है। 2024-25 के आंकड़ों में राज्य का कुल सार्वजनिक कर्ज करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये और सार्वजनिक कर्ज-GSDP अनुपात 28.93 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

बजट अनुमान और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर

बिहार के 2025-26 बजट में शुरुआत में राजकोषीय घाटा GSDP का 3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। लेकिन बाद में संशोधित अनुमान में यह आंकड़ा काफी बढ़ गया। PRS के बजट विश्लेषण के मुताबिक 2025-26 के लिए शुरुआती अनुमान 3 प्रतिशत था, जबकि संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा 11.8 प्रतिशत GSDP बताया गया। यही अंतर बिहार की वित्तीय स्थिति पर चल रही बहस को और महत्वपूर्ण बनाता है। एक तरफ सरकार के बजट अनुमान हैं, वहीं दूसरी तरफ संशोधित आंकड़े और स्वतंत्र संस्थाओं के आकलन राज्य के राजकोष पर दबाव की अलग तस्वीर पेश करते हैं।

तेजस्वी बोले- सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर जवाब जरूरी

तेजस्वी यादव ने सरकार से सवाल किया कि जब राज्य लगातार कर्ज ले रहा है तो सरकारी खजाने पर दबाव क्यों बढ़ रहा है। उन्होंने सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन की मांग करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बढ़ते कर्ज के साथ अगर राजस्व संग्रह और खर्च प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में राज्य के विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

बिहार की वित्तीय तस्वीर: आंकड़ों में समझिए

क्रिसिल के 2025-26 विश्लेषण में राजकोषीय घाटा: 5.8% GSDP

2025-26 का शुरुआती बजट अनुमान: 3% GSDP

2025-26 का संशोधित राजकोषीय घाटा: 11.8% GSDP

2024-25 में सार्वजनिक कर्ज: करीब ₹2.87 लाख करोड़

2024-25 सार्वजनिक कर्ज/GSDP अनुपात: 28.93%

2026-27 के लिए लक्ष्य: राजकोषीय घाटा 3% GSDP


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