JSSC-CGL और CDPO नियुक्तियों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा के मुताबिक, अदालत ने शुक्रवार को JSSC-CGL परीक्षा के माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने वाली अधिसूचना के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई। CDPO की नियुक्तियां रद्द करने वाले आदेश पर भी रोक लगाई गई है। इस आदेश के बाद उन अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है, जिनकी नौकरी राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के कारण प्रभावित हो रही थी।
एक दिन पहले JPSC की 11वीं और 13वीं परीक्षा पर भी रोक
इस मामले में हाईकोर्ट का यह दूसरा अहम हस्तक्षेप है। अदालत ने इससे पहले JPSC की 11वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा तथा उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी सरकारी अधिसूचनाओं पर भी रोक लगाई थी। इससे बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों को राहत मिली है। यानी झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार के हालिया फैसलों के खिलाफ अदालत में दाखिल याचिकाओं के बाद अब मामला पूरी तरह न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गया है।
क्यों रद्द की गई थीं 22 परीक्षाएं?
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से छात्रों का आंदोलन चल रहा था। आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने 18 अगस्त को 22 भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़ी चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किया था। इसके अलावा पुरानी कई परीक्षाओं की जांच कराने का भी निर्णय लिया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद एक तरफ आंदोलन कर रहे छात्रों को राहत मिली, तो दूसरी तरफ उन अभ्यर्थियों में भारी चिंता पैदा हो गई, जिन्होंने संबंधित परीक्षाएं पास करके सरकारी नौकरी हासिल की थी।
करीब 2 हजार JSSC-CGL चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी पर मंडराया था खतरा
JSSC-CGL परीक्षा के जरिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की नियुक्तियां हुई थीं। सरकारी रद्दीकरण आदेश के बाद इन चयनित उम्मीदवारों की नौकरी पर संकट पैदा हो गया था। रिपोर्टों के मुताबिक JSSC-CGL से नियुक्त करीब 1,900 से अधिक उम्मीदवार इस फैसले से प्रभावित हुए।
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल इन कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है। मामले में आगे होने वाली सुनवाई के बाद ही भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों का अंतिम भविष्य स्पष्ट होगा।
सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट क्यों पहुंचे अभ्यर्थी?
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि यदि किसी भर्ती परीक्षा में अनियमितता हुई है तो उसकी जांच और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को एक साथ रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को नुकसान हो सकता है जिनकी व्यक्तिगत रूप से कोई गलती नहीं है। इसी संदर्भ में अदालत के सामने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और चयनित अभ्यर्थियों के अधिकारों का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।
JSSC-CGL पेपर लीक मामले में जांच भी जारी
दूसरी ओर, JSSC-CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच भी जारी है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार जांच को मजबूत करने के लिए SIT में अतिरिक्त अधिकारियों को शामिल किया गया है और कई संदिग्धों से पूछताछ की गई है। इसलिए अब पूरा मामला दो स्तरों पर आगे बढ़ रहा है—एक तरफ कथित अनियमितताओं की जांच और दूसरी तरफ भर्ती रद्द करने के सरकारी फैसले की न्यायिक समीक्षा।
छात्रों के आंदोलन के बीच आया हाईकोर्ट का आदेश
भर्ती परीक्षाओं को लेकर झारखंड में कई दिनों से छात्र आंदोलन कर रहे थे। छात्रों की मांगों में परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई प्रमुख रही है। वहीं, चयनित अभ्यर्थियों का पक्ष है कि जांच में यदि किसी व्यक्ति की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना व्यक्तिगत दोष तय किए पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने से निर्दोष उम्मीदवार प्रभावित हो सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट की रोक को फिलहाल अंतरिम राहत के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह सही ठहरा दिया है या सरकार का अंतिम फैसला रद्द कर दिया है। आगे की सुनवाई में अदालत भर्ती प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं, सरकार के रद्दीकरण आदेश और प्रभावित अभ्यर्थियों के अधिकारों से जुड़े तमाम पहलुओं पर विचार करेगी। फिलहाल JSSC-CGL और CDPO नियुक्तियों पर रोक संबंधी आदेश ने हजारों प्रभावित उम्मीदवारों को तत्काल राहत दी है और झारखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद को एक नया कानूनी मोड़ दे दिया है।

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