श्रद्धालुओं के लिए ‘अतिथि देवो भव’ का संदेश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गयाजी पहुंचते हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को बेहतर सुविधाएं मिलें और वह गयाजी से सुखद अनुभव लेकर लौटे।उन्होंने अधिकारियों को घाट, आवासन, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाए रखने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से भी अपील की कि गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं और अतिथियों का बिहार की परंपरा ‘अतिथि देवो भव’ के अनुरूप पूरे सम्मान और आत्मीयता से स्वागत करें। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तकनीक और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल भी किया जा रहा है, ताकि अलग-अलग भाषाओं में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।
₹3,516 करोड़ से विष्णुपद क्षेत्र और सोन-फल्गु योजना
पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान गयाजी के लिए सबसे बड़ी विकास खबर विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के व्यापक विकास से जुड़ी है। बिहार कैबिनेट ने 15 सितंबर को विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास और सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए कुल ₹3,516.05 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। इसमें- ₹2,520 करोड़ विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए और ₹996.05 करोड़ रुपये सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए शामिल हैं। योजना के तहत मंदिर परिसर के विकास के साथ मल्टीलेवल पार्किंग, एलिवेटेड पथ, घाट, पैदल पुल, पुलिया, डॉर्मिटरी, कैंटीन और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को विकसित करने का प्रस्ताव है। केंद्र सरकार की ओर से भी विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर के व्यापक विकास को लेकर पहल की जा चुकी है। पर्यटन मंत्रालय ने 2024-25 के केंद्रीय बजट में घोषित प्रावधानों के तहत इन परियोजनाओं पर राज्य सरकार के साथ काम आगे बढ़ाया है।
फल्गु में आएगा सोन का पानी, गयाजी के जल प्रबंधन को नई दिशा
गयाजी की धार्मिक पहचान में फल्गु नदी का विशेष महत्व है। अब सोन नदी के पानी को फल्गु तक पहुंचाने की योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। स्वीकृत सोन-फल्गु लिंक परियोजना में सोन नदी से पानी उठाकर निर्धारित नेटवर्क के माध्यम से आगे पहुंचाने की योजना है। आधिकारिक परियोजना विवरण के मुताबिक इंद्रपुरी बैराज से लगभग 23 किलोमीटर ऊपर इनटेक वेल और करीब 11 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। सरकार का लक्ष्य इस परियोजना के माध्यम से गयाजी क्षेत्र में जल उपलब्धता को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने भी फल्गु नदी में सालभर पानी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किए जाने की बात कही है। यही वजह है कि इस परियोजना को धार्मिक महत्व के साथ-साथ जल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गयाजी में ₹20 हजार करोड़ के औद्योगिक निवेश की तैयारी
गयाजी की कहानी अब केवल तीर्थ और पर्यटन तक सीमित नहीं रहने वाली है। जिले में Integrated Manufacturing Cluster (IMC) को औद्योगिक विकास के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। 22 सितंबर को परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को गया IMC को अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में शुरू करने की दिशा में काम तेज करने का निर्देश दिया था। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना से लगभग ₹20,000 करोड़ के निवेश की संभावना जताई गई है। IMC गया अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के तहत विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) के अनुसार परियोजना करीब 1,670 एकड़ में विकसित की जा रही है।NICDC के परियोजना विवरण में वर्तमान निवेश क्षमता ₹16,524 करोड़ और रोजगार क्षमता 1,09,185 बताई गई है, जबकि सितंबर 2026 की राज्य सरकार से जुड़ी रिपोर्टों में करीब ₹20,000 करोड़ निवेश की संभावना बताई गई है। इसलिए दोनों आंकड़ों को परियोजना के अलग-अलग चरण/अनुमान के रूप में देखना उचित होगा। इस औद्योगिक क्लस्टर में भवन निर्माण सामग्री, एग्रो-फूड प्रोसेसिंग, चमड़ा उत्पाद, रेडीमेड वस्त्र, फर्नीचर, हथकरघा-हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग एवं फैब्रिकेशन और मेडिकल उपकरण जैसे क्षेत्रों के लिए औद्योगिक गतिविधियों की संभावना है।
गया जी एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर जोर
मुख्यमंत्री ने गया एयरपोर्ट को बिहार के प्रमुख हवाई अड्डों में शामिल बताते हुए राज्य की हवाई कनेक्टिविटी मजबूत करने की बात कही। पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट के माध्यम से कनेक्टिविटी विस्तार पर जोर है। मुख्यमंत्री ने गयाजी को इंडोनेशिया, बैंकॉक और गल्फ देशों सहित अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्थानों से जोड़ने की दिशा में बात रखी। अगर अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी का विस्तार होता है तो इसका सीधा संबंध सिर्फ पितृपक्ष में आने वाले विदेशी श्रद्धालुओं से नहीं होगा, बल्कि बोधगया पर्यटन, होटल उद्योग, स्थानीय कारोबार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।
पितृपक्ष मेले में तकनीक बनेगी श्रद्धालुओं की मददगार
गयाजी में बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए इस बार व्यवस्थाओं में तकनीक का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से मोबाइल ऐप और डिजिटल माध्यमों के जरिए श्रद्धालुओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। खास बात यह है कि अलग-अलग भाषाओं में सूचना उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से आने वाले लोगों के लिए गयाजी की यात्रा को ज्यादा व्यवस्थित बनाना है।
पुनपुन से गयाजी तक इंतजाम
पितृपक्ष के दौरान केवल गयाजी ही नहीं, पुनपुन में भी श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। बिहार पर्यटन विभाग ने पितृपक्ष 2026 के लिए पर्यटन पैकेज और अन्य सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई है। मेला अवधि 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। गया जिला प्रशासन की ओर से टेंट, पंडाल, लाइट एंड साउंड, जनरेटर और अन्य मेला व्यवस्थाओं से संबंधित तैयारियां भी की गई हैं।
गयाजी में आस्था, पर्यटन और उद्योग—तीनों का नया संगम
पितृपक्ष मेला 2026 के उद्घाटन के साथ गयाजी के विकास की तस्वीर में तीन बड़े आयाम एक साथ दिखाई दे रहे हैं—**धार्मिक पर्यटन, जल प्रबंधन और औद्योगिक विकास। **एक तरफ विष्णुपद मंदिर क्षेत्र को बड़े पैमाने पर विकसित करने की योजना है, दूसरी ओर फल्गु में सोन का पानी पहुंचाने की परियोजना है। इसके साथ डोभी क्षेत्र में IMC के जरिए औद्योगिक निवेश की संभावनाएं और गया एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में प्रयास गयाजी को आने वाले वर्षों में एक बड़े धार्मिक-पर्यटन और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना का संकेत देते हैं। फिलहाल पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 में देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए सरकार की प्राथमिकता सुविधा, सुरक्षा और सम्मानजनक आतिथ्य है। वहीं, मेले के मंच से सामने आई विकास योजनाओं ने गयाजी की आने वाली तस्वीर को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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