प्रदर्शन के मद्देनजर जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में कड़ी निगरानी रखी गई। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई। इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रदर्शन को विपक्ष का राजनीतिक अभियान बताते हुए निशाना साधा।
जंतर-मंतर पर सन्नाटा, राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रस्तावित प्रदर्शन के दिन जंतर-मंतर पर सामान्य गतिविधियों की जगह सुरक्षा व्यवस्था प्रमुखता से दिखाई दी। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 30 हजार से अधिक जवान तैनात किए गए थे। संवेदनशील स्थानों, प्रमुख सड़कों और सरकारी प्रतिष्ठानों के आसपास कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए। सुरक्षा व्यवस्था का असर यातायात और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ा। खबर के मुताबिक, 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और शहर के विभिन्न प्रवेश बिंदुओं पर सघन जांच के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, होटलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी निगरानी बढ़ाई गई। पुलिस ने जंतर-मंतर के आसपास लगातार उद्घोषणा कर लोगों और मीडियाकर्मियों को एक जगह एकत्र नहीं होने के निर्देश दिए। जो प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थल तक पहुंचने में सफल रहे, उनमें से कुछ को भी हिरासत में लिया गया।
अभिजीत दीपके और ध्रुव राठी भी हिरासत में
सीजेपी नेता अभिजीत दीपके को मुंबई से दिल्ली पहुंची उड़ान के उतरने के बाद विमान के भीतर से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। उनके साथ संगठन के दो अन्य नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में लिया गया।
सीजेपी की ओर से साझा किए गए वीडियो में दीपके पुलिस अधिकारियों से कहते सुनाई दिए कि वे प्रदर्शन के लिए आए हैं और उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर नेताओं को बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। विदेश में रहने वाले यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित उनके आवास से हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई। हालांकि, हिरासत से जुड़ी सभी परिस्थितियों और संबंधित व्यक्तियों की ओर से दिए गए बयानों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। दीपके की गिरफ्तारी के बाद सीजेपी ने एक पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो संदेश जारी किया। संगठन ने कहा कि उसके नेता मौके पर मौजूद हों या नहीं, देशभर में प्रदर्शन जारी रहेगा और अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।
विपक्षी नेताओं की हिरासत पर राजनीतिक विवाद
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे या वहां जाने की कोशिश कर रहे कई विपक्षी नेताओं को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, केरल के मुख्यमंत्री रहे पिनराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के नाम शामिल बताए गए। माकपा महासचिव एमए बेबी, वामपंथी नेता बृंदा करात, भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, अधिवक्ता प्रशांत भूषण और आइसा की अध्यक्ष नेहा को भी हिरासत में लिए जाने की खबर है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि हालात आपातकाल से भी आगे निकल गए हैं। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए किए गए इंतजामों की आलोचना की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हिरासत की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने युवाओं से विरोध जारी रखने की अपील की। राहुल गांधी उस समय चेन्नई में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कांग्रेस ने कॉजपा के इस विशेष प्रदर्शन से दूरी बनाए रखी, हालांकि पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर पहले भी सरकार पर सवाल उठाती रही है।
प्रदर्शन के दौरान पथराव, सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की खबर
प्रदर्शन के दौरान राजधानी के कुछ इलाकों में तनाव की स्थिति भी बनी। रिपोर्ट के अनुसार, आकाशवाणी भवन के पास इम्तियाज अली मार्ग पर बैरिकेड पार करने के बाद प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंके। इस घटना में दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई। शाम को कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर के पास भी इसी तरह की घटना सामने आने की बात कही गई। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान कुल सात सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की सूचना दी गई। दक्षिण दिल्ली के पुलिस उपायुक्त अनंत मित्तल को भी हाथ में चोट लगने की खबर है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, पुलिसकर्मियों पर कथित हमले के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। इन घटनाओं की जांच और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
भाजपा ने विपक्ष पर साधा निशाना
भाजपा ने प्रदर्शन को विपक्ष का राजनीतिक अभियान बताते हुए आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य दिल्ली की सामान्य व्यवस्था को बाधित करना था। पार्टी नेताओं ने इसे फ्लॉप शो करार दिया और राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं पर तीखी टिप्पणी की। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कॉजपा देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी कहा कि राजधानी को बंधक नहीं बनने दिया जाएगा। भाजपा नेता संबित पात्रा ने प्रदर्शन के घटनाक्रम को लोकतंत्र की जीत बताया। इस तरह, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और हिरासत का मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया।
पत्रकारों को हिरासत में लेने के आरोप
प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे कुछ पत्रकारों ने भी हिरासत में लिए जाने का दावा किया। पत्रकारों के मुताबिक, प्रेस पहचान पत्र दिखाने के बावजूद उन्हें पुलिस ने बसों में बैठाया। कुछ ने आधिकारिक फोन जब्त किए जाने का आरोप भी लगाया। प्रसारित दृश्यों में कुछ पत्रकार बसों के भीतर से अपने प्रेस पहचान पत्र दिखाते नजर आए। इस घटनाक्रम ने पत्रकारों की स्वतंत्र आवाजाही और प्रदर्शन स्थल पर मीडिया की पहुंच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
ध्रुव राठी की हिरासत और सोनम वांगचुक का बयान
प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि हिरासत में लिए गए लोगों को 24 घंटे के भीतर रिहा नहीं किया गया, तो वह लेह या दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, मार्च अथवा भूख हड़ताल जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। वांगचुक इससे पहले जंतर-मंतर पर कॉजपा के आंदोलन में भी शामिल हुए थे। उन्होंने मौजूदा घटनाक्रम को लेकर अपनी चिंता जाहिर की और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का मुद्दा उठाया। इसी बीच, अभिजीत दीपके की दादी सावित्रीबाई शंकरराव दीपके के निधन की खबर भी सामने आई। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, 85 वर्षीय सावित्रीबाई का महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित संतुक पिंपरी गांव में लंबी बीमारी के बाद निधन हुआ।
आगे क्या होगा?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब सुरक्षा व्यवस्था, प्रदर्शन की अनुमति, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। पुलिस की कार्रवाई, कथित पथराव और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने के आरोपों पर आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल, प्रदर्शन से संबंधित सभी दावों, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और घटनाओं के क्रम की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले में पुलिस, प्रदर्शन आयोजकों और राजनीतिक दलों के आधिकारिक बयानों से ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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