जानकारी के अनुसार, रंगूनगर टोला में नल-जल योजना के तहत करीब 300 फीट गहरे और लगभग 10 इंच चौड़े बोरवेल की खुदाई कराई गई थी। बोरवेल से पानी नहीं मिलने के कारण इसे असफल घोषित कर दिया गया था।पीएचईडी अधिकारियों का कहना है कि निर्माण एजेंसी को कई बार निर्देश दिया गया था कि असफल बोरवेल को मिट्टी भरकर पूरी तरह सुरक्षित किया जाए, लेकिन इस निर्देश का पालन नहीं किया गया।
गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे चार वर्षीय पीयूष घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह खुले बोरवेल में गिर गया था। घटना की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई थी।प्रशासन, एनडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से कई घंटों तक राहत व बचाव अभियान चलाया। देर रात करीब 1:50 बजे बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
ठेकेदार पर FIR क्यों हुई?
पीएचईडी के कनीय अभियंता शारदा सुमन ने गुरपा थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा है कि निर्माण एजेंसी मेसर्स मनोज कुमार कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को कई बार असफल बोरवेल को सुरक्षित करने का निर्देश दिया गया था।निर्देशों की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ। शिकायत में संबंधित एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। यदि जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर बताती है कि सरकारी योजनाओं के तहत अधूरे या असफल निर्माण कार्यों को बिना सुरक्षा उपायों के छोड़ देना कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सभी बोरवेलों की समय-समय पर जांच और सुरक्षित बंद करने की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।

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