जागरण प्रभात। गंडक नदी के बढ़े जलस्तर और कई स्थानों पर तटबंध टूटने से उत्तर बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। सारण के पानापुर में गुरुवार सुबह सारण मुख्य तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से निचले इलाकों में फैल रहा है। वहीं मुजफ्फरपुर के साहेबगंज इलाके में भी गंडक के दबाव से तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ है। छपरा-मुजफ्फरपुर NH-722 पर कई फीट पानी बहने के कारण सड़क संपर्क प्रभावित है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर का जायजा लेने के बाद अगले 48 घंटे को बेहद अहम बताया है। उन्होंने अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और राहत-बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया है। गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों में भारतीय वायुसेना की सहायता भी मांगी है।
गंडक का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर
बिहार जल संसाधन विभाग के अनुसार गंडक नदी का जलस्तर पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर पहुंच गया है। एक आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया है कि गंडक का जलस्तर अपने पिछले उच्चतम स्तर से करीब 22 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। नदी का पानी कुछ स्थानों पर घटने के संकेत दे रहा है, लेकिन अगले 48 घंटे तक जल दबाव बने रहने की आशंका है। इस बार की स्थिति की खास बात यह है कि बिहार में सामान्य से करीब 32 प्रतिशत कम बारिश होने के बावजूद गंगा, गंडक और सोन जैसी प्रमुख नदियों में असाधारण जलस्तर दर्ज किया गया है। जल संसाधन विभाग के अनुसार नेपाल और उत्तर प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का असर भी बिहार में दिखाई दे रहा है।
पानापुर में सुबह तटबंध टूटा, गांवों में तेजी से फैला पानी
सारण जिले के पानापुर प्रखंड में गुरुवार सुबह करीब चार बजे सरौजा-भगवानपुर के पास सारण मुख्य तटबंध टूट गया। तटबंध में टूटान के बाद पानी तेजी से निचले इलाकों की ओर बढ़ा और आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें मौके पर निगरानी तथा राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं। सारण में पानापुर के साथ मकेर, तरैया, अमनौर, परसा और दरियापुर के कई इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं। उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले के पांच प्रखंडों की 18 पंचायतों के 48 गांवों में 24,725 लोग और करीब 4,220 परिवार बाढ़ की चपेट में बताए गए हैं। राहत के लिए नाव, बोट एंबुलेंस, चिकित्सा शिविर और एनडीआरएफ/एसडीआरएफ की टीमें लगाई गई हैं।
मुजफ्फरपुर के साहेबगंज में भी तटबंध क्षतिग्रस्त
मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड में गंडक के दबाव से माधोपुर हजारी क्षेत्र में तटबंध टूटने की सूचना सामने आई है। इससे निचले इलाकों में पानी तेजी से फैलने लगा और कई घरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। प्रशासन प्रभावित लोगों की स्थिति पर नजर रख रहा है। उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी माना है कि गंडक सहित कई नदियों के तटबंधों पर अभी दबाव बना हुआ है। विभाग संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी कर रहा है।
NH-722 पर तीन से पांच फीट पानी, छपरा-मुजफ्फरपुर संपर्क प्रभावित
गंडक की बाढ़ का असर प्रमुख सड़क मार्गों पर भी दिखाई दे रहा है। छपरा-मुजफ्फरपुर NH-722 पर कई स्थानों पर तीन से पांच फीट तक पानी जमा होने की रिपोर्ट है। इसके कारण इस महत्वपूर्ण मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है और बड़े वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है। मकेर क्षेत्र में पानी बढ़ने के साथ आसपास के कई नए इलाकों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इससे बाजार, गांवों और संपर्क मार्गों पर लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
चंपारण से सारण तक कई जगह तटबंधों पर दबाव
गंडक की बाढ़ का असर पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, गोपालगंज तथा सारण तक दिखाई दे रहा है। इससे पहले पश्चिमी चंपारण में चंपारण तटबंध कई स्थानों पर टूट चुका है, जबकि पूर्वी चंपारण के अरेराज क्षेत्र में रिंग बांध क्षतिग्रस्त हुआ था। इन घटनाओं के बाद निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा बढ़ा। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश और वाल्मीकिनगर बैराज से भारी डिस्चार्ज के कारण गंडक में अचानक पानी बढ़ा था। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 29 सितंबर को वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर डिस्चार्ज 5.43 लाख क्यूसेक तक पहुंचा था।
बाढ़ से भोजन, पेयजल और पशुचारे का संकट
बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों के सामने केवल आवागमन की समस्या नहीं है। घरों में पानी घुसने के कारण भोजन, पेयजल और सुरक्षित रहने की जगह की परेशानी बढ़ रही है। पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नावों के जरिए लोगों की आवाजाही और राहत पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। सारण में राहत के लिए कम्युनिटी किचन और अन्य व्यवस्थाएं भी संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा- अगले 48 घंटे पूरी तरह सतर्क रहना होगा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना के जेपी गंगा पथ पहुंचकर गंगा के बढ़ते जलस्तर का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि अगले 48 घंटे बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इस दौरान प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहना होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तटबंधों और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने, राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने तथा बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान में भारतीय वायुसेना की सहायता भी मांगी है।
गंगा का बढ़ता जलस्तर भी चिंता का कारण
गंडक के बढ़े जलस्तर का असर गंगा नदी पर भी पड़ रहा है। पटना सहित गंगा के किनारे के कई क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ा है। राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती तटबंधों पर बने दबाव और निचले इलाकों में तेजी से फैलते पानी को नियंत्रित करना है। अगले दो दिनों में नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।

0 Comments