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Vote Chori: CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी-खरगे को मिलने से किया इनकार, आज सुप्रीम कोर्ट मार्च

जागरण प्रभात। देश में कथित ‘वोट चोरी’ और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मुलाकात के लिए समय मांगा था। हालांकि, 11 अक्टूबर की देर रात आई रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधान न्यायाधीश ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद 12 अक्टूबर को प्रस्तावित विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं, ‘वोट चोरी’ विपक्ष के आरोपों का हिस्सा है; इसे किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

CJI से मिलने के लिए खरगे और राहुल गांधी ने मांगा था समय

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 11 अक्टूबर को बेंगलुरु में कहा था कि उन्होंने और राहुल गांधी ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा है। दोनों नेता सोमवार, 12 अक्टूबर को शाम चार से पांच बजे के बीच मिलकर अपनी चिंताओं से उन्हें अवगत कराना चाहते थे। खरगे ने कहा था कि वे प्रधान न्यायाधीश से किसी तरह की मांग करने के बजाय अपनी बात रखकर हस्तक्षेप का अनुरोध करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर देश में अराजकता का माहौल पैदा करने का आरोप भी लगाया था। हालांकि, बाद में सामने आई खबरों के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। रिपोर्टों में बताया गया कि संबंधित मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक विचाराधीन हैं। विपक्षी नेताओं को इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने का रास्ता बताया गया।

‘वोट चोरी’ और SIR को लेकर विपक्ष की क्या है मांग?

विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर भी चिंता जता रहे हैं। विपक्ष की प्रमुख मांगों में कथित चुनावी अनियमितताओं की जांच, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार जैसे मुद्दे शामिल हैं। विपक्ष के कुछ नेताओं ने मतदान में फिर से मतपत्रों के इस्तेमाल की मांग भी उठाई है।कांग्रेस और विपक्षी दलों के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध प्रमाणों पर निर्भर करेगा। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है।

दिल्ली में प्रदर्शन और हिरासत पर खरगे ने उठाए सवाल

खरगे ने शनिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान तैनात किए गए थे। खरगे के अनुसार, दिल्ली में सड़कों पर पाबंदियां लगाई गईं और कुछ क्षेत्रों में आवाजाही तथा संचार सेवाओं पर प्रतिबंधों के कारण लोगों को परेशानी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के आंदोलन से घबराई हुई है और लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी कार्रवाई को लेकर खरगे के बयान कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर जारी है विवाद

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों का प्रदर्शन पिछले कई दिनों से जारी है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर उनकी चिंताओं का उचित समाधान नहीं किया गया है। इससे पहले विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग तक मार्च निकालने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें रास्ते में रोक दिया गया था। प्रदर्शन के दौरान कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई थीं। विपक्ष अब इस मुद्दे को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाने की तैयारी में है। 12 अक्टूबर को प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट मार्च के जरिए विपक्ष चुनावी पारदर्शिता, मतदाता अधिकारों और निर्वाचन आयोग की भूमिका से संबंधित अपनी मांगें सामने रखना चाहता है।


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