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‎12 साल बाद मिला इंसाफ: चार महिलाओं पर तेजाब फेंकने वाले दोषी को उम्रकैद, अदालत ने पीड़िता को मुआवजा देने का भी दिया आदेश

 

Jagran Prabhat :बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में वर्ष 2014 में हुई दिल दहला देने वाली तेजाब हमले की घटना में अदालत ने 12 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। 21वीं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चार महिलाओं पर तेजाब फेंककर गंभीर रूप से घायल करने के मामले में दोषी विजय कुमार यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने उस पर 2.17 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

‎अदालत ने अपने आदेश में मुख्य पीड़िता को बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश भी दिया है। इसके लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकार और जिला प्रतिकर समिति को भेजी गई है।

‎क्या था पूरा मामला?

‎अभियोजन के अनुसार, 9 फरवरी 2014 को घोड़ासहन थाना क्षेत्र के जगीरहां कोठी गांव में संपत्ति विवाद को लेकर आरोपी विजय कुमार यादव अपने साथियों के साथ रेणु देवी के घर पहुंचा। आरोप है कि पहले गला घोंटकर हत्या की कोशिश की गई और जब घर की अन्य महिलाएं बचाने पहुंचीं तो उन पर तेजाब फेंक दिया गया।

‎इस हमले में रेणु देवी, संगीता देवी, वर्षा कुमारी और रिमझिम कुमारी गंभीर रूप से झुलस गई थीं। सभी को पहले घोड़ासहन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, फिर सदर अस्पताल मोतिहारी और बाद में बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच, पटना भेजा गया, जहां उनका लंबे समय तक उपचार चला।

‎संपत्ति कब्जाने की थी साजिश

‎शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया था कि उसकी कोई संतान नहीं है और आरोपी उसकी हत्या कर संपत्ति पर कब्जा करना चाहते थे। इसी उद्देश्य से पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया गया।

‎पुलिस जांच के बाद चार आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। हालांकि इस मामले में अन्य तीन आरोपितों के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई अभी अलग-अलग जारी है।

‎13 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला

‎सत्रवाद संख्या 565/2014 की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए। उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने विजय कुमार यादव को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और अर्थदंड की सजा सुनाई।

‎यह फैसला तेजाब हमले जैसी गंभीर घटनाओं में न्याय व्यवस्था की जवाबदेही और पीड़ितों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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