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Friendship Day : दोस्ती की डोर से शुरू होती है हर मोहब्बत की दास्तां, भरोसे की स्याही से उम्रभर लिखे जाते हैं रिश्तों के अफसाने


Jagran Prabhat : हर साल अगस्त के पहले रविवार को भारत में फ्रेंडशिप डे (Friendship Day) पूरे उत्साह और अपनत्व के साथ मनाया जाता है। इस दिन दोस्त एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड बांधते हैं, शुभकामनाएं देते हैं और पुराने दिनों की यादें ताजा करते हैं। सोशल मीडिया पर #FriendshipDay ट्रेंड करता है और लाखों लोग अपने खास दोस्तों के साथ तस्वीरें साझा करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर फ्रेंडशिप डे क्यों मनाया जाता है? इसकी शुरुआत कब हुई? इसका महत्व क्या है? और क्या दोस्ती केवल युवाओं तक ही सीमित है या पति-पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन और सहकर्मियों के रिश्तों में भी इसकी अहम भूमिका होती है? दोस्ती केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने वाली भावना है। यही कारण है कि बदलते समय में भी इसकी अहमियत कम नहीं हुई है।

फ्रेंडशिप डे क्यों मनाया जाता है?

फ्रेंडशिप डे का उद्देश्य लोगों के बीच प्रेम, विश्वास, सहयोग और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना है। दोस्ती ऐसा रिश्ता है जिसे कोई सामाजिक बंधन नहीं बांधता। यह रिश्ता केवल भरोसे, अपनापन और भावनाओं पर टिका होता है। इसी रिश्ते का सम्मान करने के लिए फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने काम और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो गए हैं कि रिश्तों के लिए समय निकालना मुश्किल होता जा रहा है। फ्रेंडशिप डे हमें याद दिलाता है कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी धन नहीं, बल्कि अच्छे रिश्ते और सच्चे दोस्त होते हैं।

फ्रेंडशिप डे की शुरुआत कब हुई?

फ्रेंडशिप डे की शुरुआत 20वीं शताब्दी में मानी जाती है। वर्ष 1935 में अमेरिका में मित्रता के सम्मान में एक विशेष दिन मनाने की परंपरा शुरू हुई। बाद में यह विचार दुनिया के कई देशों तक पहुंचा। वर्ष 2011 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 30 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस (International Day of Friendship) के रूप में मान्यता दी।

हालांकि भारत, नेपाल, बांग्लादेश और कुछ अन्य देशों में अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाने की परंपरा अधिक लोकप्रिय हो गई। स्कूलों, कॉलेजों और युवाओं के बीच यह दिन विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है।

भारत में अगस्त के पहले रविवार को ही क्यों मनाया जाता है?

भारत में रविवार छुट्टी का दिन होता है। छात्र, युवा और नौकरीपेशा लोग इस दिन आसानी से अपने दोस्तों से मिल सकते हैं। यही वजह है कि अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाने की परंपरा मजबूत होती चली गई। आज यह केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से जोड़ने का अवसर बन चुका है।

युवाओं के लिए दोस्ती क्यों जरूरी है?

युवावस्था जीवन का सबसे संवेदनशील दौर होता है। इसी समय करियर, पढ़ाई, प्रतियोगिता और भविष्य की चिंता सबसे ज्यादा होती है। ऐसे समय में एक सच्चा दोस्त मानसिक सहारा बनता है।दोस्त वह होता है जो सफलता पर सबसे ज्यादा खुश होता है और असफलता के समय सबसे पहले साथ खड़ा दिखाई देता है। मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि मजबूत दोस्ती तनाव कम करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।आज सोशल मीडिया पर हजारों दोस्त बन जाते हैं, लेकिन मुश्किल समय में साथ देने वाले दोस्त बहुत कम होते हैं। इसलिए सच्ची दोस्ती की पहचान लाइक और फॉलोअर्स से नहीं, बल्कि विश्वास और साथ निभाने से होती है।

पति-पत्नी के रिश्ते में दोस्ती क्यों जरूरी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि सफल वैवाहिक जीवन की सबसे मजबूत नींव दोस्ती होती है। जहां पति-पत्नी केवल जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि अच्छे दोस्त भी होते हैं, वहां संवाद बेहतर होता है, गलतफहमियां कम होती हैं और रिश्ता अधिक मजबूत बनता है।

जब पति-पत्नी एक-दूसरे की बात बिना झिझक सुनते हैं, मुश्किल समय में साथ देते हैं और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं, तब विवाह केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि खूबसूरत साझेदारी बन जाता है। यही कारण है कि आज कई परिवार विशेषज्ञ भी पति-पत्नी को पहले अच्छा मित्र बनने की सलाह देते हैं।

दोस्ती केवल युवाओं तक सीमित नहीं

अक्सर माना जाता है कि दोस्ती केवल स्कूल और कॉलेज तक ही सीमित होती है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। जीवन के हर पड़ाव पर दोस्ती की जरूरत होती है। एक किसान अपने पड़ोसी में दोस्त खोजता है। एक सैनिक अपने साथी जवान में दोस्ती का भरोसा पाता है। कार्यालय में सहकर्मी कठिन समय में सबसे बड़े सहयोगी बन जाते हैं। बुजुर्गों के लिए बचपन के मित्र आज भी सबसे अनमोल यादें होते हैं। यानी दोस्ती उम्र, जाति, धर्म, भाषा और सीमाओं से ऊपर उठकर इंसान को इंसान से जोड़ने का काम करती है।

डिजिटल युग में दोस्ती का बदलता स्वरूप

आज मोबाइल और इंटरनेट ने दुनिया को करीब जरूर ला दिया है, लेकिन कई बार भावनात्मक दूरियां भी बढ़ी हैं। लोग घंटों सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं, लेकिन अपने सबसे करीबी दोस्त से महीनों तक बात नहीं कर पाते। फ्रेंडशिप डे हमें यह याद दिलाता है कि केवल ऑनलाइन शुभकामनाएं भेजना ही काफी नहीं है। रिश्तों को समय देना, संवाद बनाए रखना और एक-दूसरे की खुशियों और परेशानियों में शामिल होना ही सच्ची दोस्ती है।

दोस्ती हमें क्या सिखाती है?

दोस्ती हमें निस्वार्थ भाव से साथ देना सिखाती है। यह विश्वास करना, माफ करना, सहयोग करना और दूसरों की खुशी में खुश होना सिखाती है। सच्चा दोस्त वही होता है जो आपकी सफलता पर तालियां बजाए और असफलता में आपका हाथ थाम ले।

इस फ्रेंडशिप डे क्या करें?

अगर किसी पुराने दोस्त से वर्षों से बात नहीं हुई है, तो आज उसे फोन करें। किसी नाराज दोस्त से माफी मांग लें। अपने जीवनसाथी के साथ कुछ समय बिताएं और उन्हें केवल पति या पत्नी नहीं, बल्कि अपना सबसे अच्छा दोस्त मानने की कोशिश करें। अपने बच्चों के साथ दोस्त जैसा व्यवहार करें और माता-पिता के साथ खुलकर बातचीत करें। यही इस दिन की सबसे बड़ी सीख है।

‘मैं तुम्हारे साथ हूं’

फ्रेंडशिप डे केवल फ्रेंडशिप बैंड बांधने या सोशल मीडिया पोस्ट साझा करने का दिन नहीं है। यह उन रिश्तों को सम्मान देने का अवसर है जो बिना किसी स्वार्थ के जीवनभर हमारा साथ निभाते हैं। सच्ची दोस्ती उम्र, समय और दूरी से नहीं टूटती। वह हर परिस्थिति में भरोसा, अपनापन और हौसला देती है।आज जब दुनिया तेज़ी से बदल रही है और रिश्तों में औपचारिकता बढ़ती जा रही है, ऐसे समय में फ्रेंडशिप डे हमें याद दिलाता है कि जीवन की सबसे बड़ी दौलत बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि वे लोग हैं जो हर परिस्थिति में मुस्कुराकर कहते हैं-‘मैं तुम्हारे साथ हूं।’ यही दोस्ती का सबसे सुंदर अर्थ है और यही फ्रेंडशिप डे का सबसे बड़ा संदेश।


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